एक पीस मिठाई ने दादा-पोती को मार दिया:खुशबू के पिता बोले- हकीकत क्या है, मुझे जानना है; छिंदवाड़ा में मीठे ने ली तीन जानें

एक थैला…जिसमें कोई मिठाई समेत कुछ सामान छोड़ गया। इस मिठाई को पांच लोगों ने खाया, जिसमें से तीन अब इस दुनिया में नहीं हैं। एक पीस मिठाई ने दो परिवारों को जिंदगी भर का दर्द दे दिया। किसी के पिता तो किसी की बहन-बेटी अब उनके बीच नहीं है। किसी के परिवार का इकलौता कमाने वाला चला गया। अब सिर्फ पीछे कुछ छूटा है तो आंखों में आंसू…। यह दर्दनाक दास्तां छिंदवाड़ा के जुन्नारदेव की है। शुक्रवार को पीएचई विभाग के गार्ड दशरू यदुवंशी (53) सुंदर लाल कथूरिया (72), संतोषी बाई और खुशबू और उसकी बहन पूजा ने जहरीली मिठाई खाई। रात में पांचों की तबीयत बिगड़ी। चार लोगों को अस्पताल ले जाना पड़ा, यहां तीन की जान चली गई। 11 जनवरी को गार्ड दसरू। 13 जनवरी को सुंदर लाल और 14 जनवरी को खुशबू (27) की भी जान चली गई। खुशबू की मां संतोषी बाई का अभी भी इलाज चल रहा है। बहन पूजा की ठीक है। आखिर ये जहरीली मिटाई कहां से आई, कौन छोड़कर गया, इन्हें कैसे मिली, इन सवालों के जवाब तलाशने दैनिक भास्कर की टीम जुन्नारदेव पहुंची। यहां पीड़ित परिवारों से बात की। पढ़िए रिपोर्ट… पहले जानिए ‘मीठी मौत’ का पूरा घटनाक्रम पूरे घटनाक्रम की शुरुआत जुन्नारदेव स्थित लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) कार्यालय के सामने से हुई। दफ्तर के सामने ही मुकेश कथुरिया कई सालों से यहां चाय की दुकान चला रहे हैं। दसरू यदुवंशी पीएचई में गार्ड थे और नाइट ड्यूटी करते थे। चाय के चलते दसरू और मुकेश की अच्छी पटती थी। दोनों रात में चाय की चुस्की के साथ लंबी बैठक किया करते थे। परिवार के लोग भी एक-दूसरे से परिचित थे। थैले में सब्जी, नमकीन और मिठाई का डिब्बा था
दसरू की बेटी कीर्ति कहती है- पापा नाइट ड्यूटी के लिए घर से शाम करीब 5 बजे रोज निकल जाया करते थे। सुबह करीब 9 बजे वापस आया करते थे। 8 जनवरी यानी गुरुवार शाम पापा ड्यूटी पर पहुंचे तो यहां मुकेश अंकल के दुकान के किनारे पर एक थैला टंगा हुआ था। पापा ने पहले ध्यान नहीं दिया। कुछ घंटे बाद बाहर आए तो थैला वहीं पर टंगा हुआ था। उन्हें लगा कोई गलती से छोड़कर गया होगा, इसलिए उन्होंने उसे उतारकर देखा। थैले में सब्जी, नमकीन और मिठाई का एक डिब्बा रखा हुआ था। पापा को लगा भूल से कोई छोड़ गया है, इसलिए उन्होंने थैले को वापस वहीं पर टंगा दिया और अपनी ड्यूटी पर तैनात हो गए। सुबह ड्यूटी पूरी कर वापस घर आ गए, तब उनका ध्यान थैले पर नहीं गया। 24 घंटे तक वहीं लटका रहा थैला
रात के बाद पूरा एक दिन बीत गया, लेकिन वह थैला लेने कोई नहीं आया। अगले दिन शुक्रवार (9 जनवरी) को पापा फिर से वापस ड्यूटी पर पहुंचे। उनकी नजर थैले पर पड़ी। थैला वहीं पर टंगा हुआ था। पापा ने छोला निकाला। मिठाई खराब हो जाएगी, शायद यह सोचकर एक-दो पीस मिठाई निकाली होगी। इसके बाद वापस थैला टांग दिया। मिठाई खाकर वे काम पर लग गए। रात 8:30 बज रहे होंगे। पिता जी का कॉल आया, बोले- बेटी पेट में बहुत जोर का दर्द उठ रहा है। उल्टियां भी हो रही हैं। घर पर हम बेटियां और मां थीं। ड्यूटी स्थल तक आने‑जाने का साधन नहीं था। हमने कहा- पापा आप परेशान मत होइए, हम ममेरे भाई को भेज रहे हैं। हमने भाई को कॉल किया, वह मौके पर पहुंचा। इस दौरान पापा शायद मेडिकल से कुछ दवाई लाकर खा चुके थे। भाई उन्हें घर लेकर आया। दवा से ज्यादा आराम नहीं मिला। दर्द बढ़ता देख हम उन्हें सरकारी अस्पताल ले गए। यहां से डॉक्टरों ने तुरंत छिंदवाड़ा जिला अस्पताल रेफर कर दिया। छिंदवाड़ा रेफर करने के बाद वे अच्छे हो रहे थे, बस शरीर के हिस्से में लकवा लग गया था। वे बातचीत भी कर रहे थे। रात में ठीक रहे। सुबह डॉक्टरों ने नागपुर लेकर जाने को कहा। हम उन्हें नागपुर लेकर जाने के लिए रवाना हुए, लेकिन वे नहीं रहे। बेटी का कहना है कि हमें तो पहले पता ही नहीं था कि पापा ने मिठाई खाई, जिससे उनकी तबीयत खराब हुई है। जब दूसरे लोगों की तबीयत खराब हुई, तब यह पूरी कहानी निकलकर आई। हमारे सिर से पिता का साया उठ गया। हमारी क्या गलती थी, जो जहरीली मिठाई रखकर हमारे पापा को हमसे छीन लिया गया। क्यों किया, किस कारण किया… मन में बस यही सवाल उठते हैं। …ऐसे पहुंची कथुरिया परिवार के घर जहरीली मिठाई
10 जनवरी यानी शनिवार सुबह दसरू की मौत से अनजान मुकेश की पत्नी संतोषी कथुरिया रोज की तरह दुकान खोलने पहुंचीं। उनकी नजर थैले पर पड़ी। उन्होंने थैला निकालकर देखा तो उसमें सामान के साथ मिठाई का पैकेट रखा दिखा। संतोषी ने मिठाई के चार पीस निकाले और अपने पास रखकर थैले को वापस वहीं पर टांग दिया। कुछ देर बाद पति मुकेश दुकान पर पहुंचे तो संतोषी घर लौट आई। घर पहुंची तो बेटी खुशबू की नजर मां के हाथ में रखी मिठाई पर पड़ी। खुशबू ने दो पीस मिठाई उठाई और एक मां को खिलाया, दूसरी खुद खा गई। छोटी बेटी पूजा ने मांगा तो मां संतोषी ने मिठाई के पीस को तोड़कर आधा उसे दे दिया। ससुर सुंदरलाल कथुरिया ने भी मिठाई खाने की इच्छा जाहिर की तो पूजा ने थोड़ी मिठाई खाते हुए बाकी दादा को दे दी। सास उस समय चाय पी रही थीं, इसलिए उन्होंने मिठाई बाद में खाने की बात कही और अलग रखने को कहा। कुछ ही देर में एक‑एक कर सभी की तबीयत बिगड़ने लगी। सबसे पहले पूजा को उल्टियां हुईं, फिर खुशबू और संतोषी की हालत खराब हुई। घबराए परिजनों ने मुकेश को कॉल किया। वह भागे-भागे दुकान से घर पहुंचे। दोपहर 12 बजे तक सुंदरलाल समेत सभी की तबीयत खराब हो चुकी थी। सभी को तत्काल अस्पातल लाया गया। यहां दवा से पूजा की हालत में सुधार हो गया, लेकिन तीनों को छिंदवाड़ा रेफर कर दिया गया। मां‑बेटी को परासिया रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि दादा सुंदरलाल को दूसरे अस्पताल में रखा गया। 13 जनवरी (मंगलवार) सुबह सुंदरलाल कथुरिया की मौत हो गई। इसी दिन बेटी खुशबू की हालत और बिगड़ गई। उसे मंगलवार देर रात नागपुर रेफर किया गया, जहां बुधवार सुबह उसने भी दम तोड़ दिया। इस हादसे में सिर्फ संतोषी की हालत में सुधार हुआ है। नाम मात्र की मिठाई खाने वाली पूजा जुन्नारदेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से दवा लेकर पूरी तरह ठीक हो गई। पिता बोले- हकीकत क्या, मुझे यही जानना है
मुकेश ने बताया कि पत्नी संतोषी, बेटी पूजा और खुशबू, पिता सुंदरलाल ने मिठाई खाई थी। मेरी बेटी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही थी। वह तड़प रही थी। मेरे बुजुर्ग पिता की मौत के बाद मंगलवार रात 12 बजे बेटी ने कॉल कर बताया कि खुशबू की हालत में सुधार नहीं हो रही है। मैं उसे लेकर नागपुर जा रही हूं। अब आगे अपनी किस्मत। तुम हिम्मत रखना। रात में कुछ कागज चाहिए तो मेरे छोटे भाई ने उसे भेजा। सुबह उसकी मौत क सूचना आई। मुझे तो बस मिठाई के बारे में इतना पता है कि दसरू ने पहले मिठाई खाई थी। उन्हें उल्टी हुई। वे हमें कोई सूचना भी नहीं दे पाए। बीमार होने पर उन्होंने सामने किराना दुकान संचालक से 500 रुपए उधार लेकर दवा ली थी। इसके बाद उन्हें घर लेकर चले गए थे। हालत खराब होने पर उन्हें सरकारी अस्पताल ले गए। यहां से छिंदवाड़ा लेकर आए। अब किसने वहां जहरीली मिठाई रखी, मुझे नहीं पता। उस एक पीस मिटाई ने मेरे पिता और बेटी को मार दिया। बस यही कहना चाहूंगा कि जिसने ऐसा किया, उसे सजा मिले। यह बस होनी है या फिर दुश्मनी है, यह तो ऊपर वाला जाने। हकीकत क्या है, मुझे बस यही जानना है। चार बेटियों के सिर से उठा पिता का साया
दसरू के दामाद सौरभ यदुवंशी ने बताया कि पीएचई गार्ड दसरू यदुवंशी अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनकी चार बेटियां हैं। दो की शादी हो चुकी है, जबकि दो अब भी अनमैरिड हैं। पिता की मौत के बाद परिवार के सामने रोजगार, जीवन‑यापन और बेटियों के भविष्य का गहरा संकट खड़ा हो गया है। पुलिस पता लगा रही- वहां थैला किसने रखा
जुन्नारदेव थाना प्रभारी राकेश बघेल के अनुसार, पुलिस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि थैला वहां किसने रखा था। पुलिस का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी और जल्द ही इस मामले की परत‑दर‑परत सच्चाई सामने लाई जाएगी। ये खबर भी पढ़ें…
छिंदवाड़ा में लावारिस मिठाई खाने से तीसरी मौत छिंदवाड़ा के जुन्नारदेव में होटल में छोड़ी गई लावारिस मिठाई खाने से बुधवार को तीसरी मौत हो गई। मंगलवार देर रात बीमार खुशबू को छिंदवाड़ा से नागपुर रेफर किया गया था। यहां इलाज के दौरान आज सुबह 6:30 बजे उसने दम तोड़ दिया। उसके शरीर के सभी अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। पढ़ें पूरी खबर…

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *