भास्कर न्यूज | लोहरदगा दो दिवसीय संतमत-सत्संग दूसरे दिन रविवार को भक्तिभाव से संपन्न हुआ। वहीं महर्षि मेंही आश्रम कुप्पाघाट भागलपुर बिहार से पधारे स्वामी निर्मलानंद जी महाराज ने धर्म, अध्यात्म और ईश्वर की एकता पर जोर देते हुए कहा कि इस धरती को मां कहकर लोग संबोधित करते हैं। विविध धर्मों के मानने वाले लोग इस देश की विशेषता हैं। सभी धर्म अलग-अलग बातों को कहते हैं लेकिन अंततः एक ही सत्य पर पहुंचते हैं कि ईश्वर एक है। ईश्वर की मान्यताएं सभी धर्मों में है भले ही कोई उसे राम कहे, कृष्ण कहे, मां दुर्गा कहे, अल्लाह कहे, खुदा कहे या गॉड कहे आवश्यकता है कि हम ईश्वर को जानने का प्रयास करें। वहीं स्वामी रामेश्वरानंद जी महराज, स्वामी लक्ष्मण जी महाराज और स्वामी रविंद्र बाबा जी ने भी आध्यात्मिक साधना, ध्यान और सत्संग की महिमा पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संतमत के माध्यम से आत्मिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति संभव है। वहीं भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। साथ ही श्रद्धालुओं ने संतों के प्रवचनों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को सकारात्मक दिशा देने का संकल्प लिया।


