दिखावे की सख्ती:निगम क्षेत्रों में भी अवैध प्लॉटिंग, लेकिन अब तक एक भी एफआईआर दर्ज नहीं

प्रदेश सरकार भले ही अवैध कॉलोनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दे रही है, लेकिन भोपाल में जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट नजर आ रही है। अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई को लेकर बड़ा विरोधाभास सामने आया है। एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों में एसडीएम के माध्यम से अब तक 12 से अधिक मामलों में केस दर्ज किए जा चुके हैं। वहीं, दूसरी ओर नगर निगम सीमा में अब तक एक भी नई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। जिला प्रशासन अब तक अवैध कॉलोनी विकसित करने वाले जमीन मालिकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए 113 कॉलोनियों की सूची तैयार कर चुका है। इसके बावजूद नगर निगम क्षेत्र में न तो कोई नई एफआईआर दर्ज कराई गई है और न ही प्राप्त शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई है। नतीजतन, शहर के चारों ओर अवैध कॉलोनियां धड़ल्ले से काटी जा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्र में बैरसिया थाने को अब तक अवैध कॉलोनी से जुड़े छह आवेदन एफआईआर के लिए मिले हैं, लेकिन चार दिन बीत जाने के बाद भी इन पर केस दर्ज नहीं किया गया है। इससे अवैध कॉलोनी संचालकों के हौसले बढ़े हैं। शहर के आसपास कई स्थानों पर अवैध प्लॉटिंग कर 1200 रुपए से लेकर 2000 रुपए प्रति वर्गफीट तक की दर से प्लॉट बेचे जा रहे हैं। खरीदारों को भरोसा दिलाया जा रहा है कि सड़क, बिजली और पानी सहित सभी मूलभूत सुविधाएं विकसित कर दी जाएंगी। निगम क्षेत्र में यहां धड़ल्ले से हो रही प्लॉटिंग
नगर निगम सीमा में भानपुर, पीपुल्स मॉल के पीछे का इलाका, नबीबाग, पलासी, बड़वई, संजीव नगर के आसपास का क्षेत्र, नीलबड़, कलखेड़ा, कोलार, दीपड़ी, कोकता सहित कई इलाकों में बड़े पैमाने पर अवैध कॉलोनियों में प्लॉटिंग का काम चल रहा है। यहां कॉलोनी माफिया खेतों को प्लॉट में तब्दील कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन अधिकारियों पर निगरानी की जिम्मेदारी है, उन्हें यह गतिविधियां दिखाई ही नहीं दे रही हैं। कार्रवाई अचानक क्यों बंद हुई, इसका कोई जवाब नहीं
भोपाल में अवैध कॉलोनी संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और तोड़फोड़ की कार्रवाई को लेकर विस्तृत योजना बनाई गई थी। लेकिन अचानक कार्रवाई थमने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर किसके निर्देश पर यह कार्रवाई रोकी गई, इसका जवाब किसी भी जिम्मेदार अधिकारी के पास नहीं है। कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, जल्द इसकी समीक्षा करेंगे
जिन भी अवैध कॉलोनियों को चिह्नित किया गया है, उन पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी एसडीएम और नगर निगम अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में कार्रवाई के लिए कहा गया है। जल्द ही इसकी समीक्षा की जाएगी।
-कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर, भोपाल

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