गंगाभैरवघाटी लेपर्ड सफारी में मानसून से पहले मार्च तक प्रे-बेस तैयार होगा। वन विभाग द्वारा यहां 15 चीतल यानी स्पॉटेड डीयर छोड़े जाएंगे। प्रजनन होने के बाद इन्हें खुले जंगल में पैंथर के शिकार के लिए छोड़ा जाएगा। गंगाभैरव घाटी में पैंथर की संख्या फिलहाल 15 है। एक पैंथर प्रतिदिन 4 से 5 किलो मांस खाता है जिनकी संख्या के हिसाब से ही प्रे-बेस तैयार होगा। भविष्य में यहां सांभर, नीलगाय और जंगली सूअर भी छोड़ने की योजना है। क्षेत्र का सर्वेक्षण कर मिट्टी, आसपास के जल स्रोत और वनस्पति का मूल्यांकन किया जा चुका है। यहां प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा (विलायती बबूल) को हटाकर 4 हेक्टेयर घास के मैदान विकसित करेंगे। यहां वाटर होल बनाए जाएंगे। प्रे-बेस तैयार होने के बाद लेपर्ड को शिकार के लिए वन्य क्षेत्र में ही पर्याप्त भोजन मिल सकेगा। ये आबादी क्षेत्र में मूवमेंट नहीं करेंगे। डीएफओ पी. बालामुरुगन ने कहा कि प्रे-बेस मार्च से पहले बनकर तैयार होगा। शुरुआत में 15 चीतल छोड़े जाएंगे। वैज्ञानिक प्रक्रिया से तैयार हो रहे प्रे-बेस के लिए नियमित मॉनिटरिंग, एंटी-पोचिंग उपाय और हैबिटेट संवर्धन जैसी तकनीक काम में ली जा रही है। भैरव घाटी में फिलहाल पैंथर की संख्या 15 है।


