11 माह बाद भी नहीं हटा बीआरटीएस:कोर्ट ने ठेकेदार से कहा- कॉन्ट्रैक्ट लेते वक्त नफा नुकसान नहीं देखा; रैलिंग हटाएं, नहीं तो जुर्माना

बीआरटीएस की रैलिंग 11 महीने बाद भी पूरी तरह नहीं हट पाने को लेकर विचाराधीन जनहित याचिका पर सोमवार को हाई कोर्ट की डिविजन बेंच में सुनवाई हुई। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने कॉन्ट्रैक्टर को उपस्थित रहने के निर्देश दिए थे। कॉन्ट्रैक्टर दिनेश यादव ने कोर्ट में कहा कि “मुझे फायदा नहीं हो रहा है। अपनी जेब का पैसा लगाना पड़ रहा है।” “जितना अनुमान था, उतना लोहा नहीं निकल रहा है। इसलिए मैं काम करने में असमर्थ हूँ।” इस पर हाई कोर्ट ने उसे जमकर डाँटा। कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि “काॅन्ट्रैक्ट लेते वक्त आपने नफा-नुकसान का आंकलन नहीं किया था क्या? जबरन की बहानेबाजी मत बनाइए। आपने काम शुरू किया तो उसी समय समझ आया क्या कि इस कॉन्ट्रैक्ट में फायदा नहीं होगा?” हाई कोर्ट ने चेतावनी दी कि काम पूरा नहीं करने पर कॉन्ट्रैक्टर को केवल ब्लैक लिस्ट करने से कुछ नहीं होगा। उस पर भारी जुर्माना भी लगाना होगा। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला, जस्टिस आलोक अवस्थी की डिविजन बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। राजलक्ष्मी फाउंडेशन के द्वारा इस मामले में जनहित याचिका दायर की गई है। कलेक्टर शिवम वर्मा, निगमायुक्त क्षितिज सिंघल भी सुनवाई के दौरान मौजूद थे। कोर्ट ने उनसे भी रैलिंग, अतिक्रमण को लेकर सवाल-जवाब किए। सिर्फ ब्लैक लिस्ट करने से काम नहीं चलेगा… हाई कोर्ट: रैलिंग आखिर हटकर बीच में मीडिएशन क्यों नहीं बन पा रहा है? नगर निगम: एलआईजी से नौलखा तक एलिवेटेड कॉरिडोर बनेगा, लोनिवि यह काम कर रहा है। याचिकाकर्ता: ये फिर नई बात कर रहे हैं, ब्रिज के नाम पर ढाई-तीन साल तक परेशानी होगी, डिवाइडर बनाकर ट्रैफिक शुरू हो। हाई कोर्ट: यह जनहित का मामला है। हम इस मामले में किसी तरह की बहानेबाजी नहीं सुनेंगे, कॉन्ट्रैक्टर पर कार्रवाई होगी। निगमायुक्त: काम नहीं करने पर बैंक गारंटी हम सीज कर लेंगे, ब्लैक लिस्ट भी किया जाएगा। हाई कोर्ट: सिर्फ ब्लैक लिस्ट करने से काम नहीं चलेगा, भारी जुर्माना भी लगाया जाए। निगमायुक्त: बिल्कुल, हमने चेतावनी दी है, पहले ही पूरी जानकारी कॉन्ट्रैक्टर को दी थी। कोर्ट ने कॉन्ट्रैक्टर की दलील नहीं सुनी कॉन्ट्रैक्टर ने कोर्ट में कहा कि नगर निगम सपोर्ट नहीं कर रही है। बस स्टेशन हटने के बाद मलबा पड़ा हुआ है। उसे डिपो में नहीं रखवाया जा रहा है। साढ़े तीन करोड़ रुपए का अनुमान था, लेकिन ढाई करोड़ रुपए भी नहीं निकल पा रहे हैं। मैं अपनी जेब का पैसा लगाकर काम करवा रहा हूँ। इसलिए काम बंद कर दिया है। हाई कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि “देखिए, हमारे लिए जनहित सबसे ऊपर है। आपका हित नहीं चलेगा।” कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि समन्वय कर काम पूरा करवाया जाएगा। हाई कोर्ट अब 28 जनवरी को इस मामले की सुनवाई करेगी।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *