राजस्थान हाई कोर्ट के सख्त रुख के बाद अब अस्पतालों में डॉक्टरों की ‘समझ में नहीं आने वाली’ लिखावट का दौर समाप्त होगा। आगामी 1 फरवरी से प्रदेश के सभी डॉक्टरों और मेडिकल जूरिस्टों के लिए हाथ से लिखी मेडिकल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट जारी करना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। अब हर घाव की चोट और मौत का कारण कंप्यूटर के साफ अक्षरों में दर्ज होगा। अक्सर अदालती कार्यवाही के दौरान डॉक्टरों द्वारा लिखी गई मेडिकल रिपोर्ट को पढ़ना न्यायाधीशों और वकीलों के लिए किसी पहेली को सुलझाने जैसा होता था। खराब हैंडराइटिंग के कारण न केवल कानूनी प्रक्रिया में देरी होती थी, बल्कि कई बार साक्ष्यों की गलत व्याख्या होने से न्याय मिलने में भी बाधा आती थी। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए हाई कोर्ट ने डिजिटल रिपोर्ट का आदेश जारी किया है। BDK हॉस्पिटल के PMO डॉ जितेंद्र भांबू ने बताया कि 1 फरवरी से कोर्ट मान्य नहीं करेगा। हमारी पूरी तैयारी है। हम तो पिछले 2 महीने कंप्यूटरराइज ही बना रहे है। पूरी तैयारी की हुई है। QR कोड और ई-हस्ताक्षर नई व्यवस्था को पूरी तरह सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए इसमें आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल होगा। प्रत्येक रिपोर्ट पर एक यूनिक क्यूआर कोड अंकित होगा। इसे स्कैन करते ही रिपोर्ट की वास्तविकता की पुष्टि की जा सकेगी, जिससे फर्जी रिपोर्ट के खेल पर लगाम लगेगी। संबंधित डॉक्टर या विशेषज्ञ के डिजिटल हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे, जो इसे एक कानूनी दस्तावेज के रूप में अधिक मजबूती प्रदान करेंगे। डिजिटल होने के कारण रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की काट-छांट या बदलाव (Tampering) संभव नहीं होगी, जिससे केस की पारदर्शिता बनी रहेगी। लापरवाही पर गिरेगी गाज: SP होंगे जिम्मेदार हाई कोर्ट ने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए राज्य सरकार को 1 फरवरी तक की डेडलाइन दी है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि इस तारीख के बाद कोई भी हस्तलिखित रिपोर्ट पेश की जाती है, तो इसके लिए संबंधित पुलिस अधीक्षक (SP) और जांच अधिकारी को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाएगा और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।


