छत्तीसगढ़ में राजनांदगांव में धर्मांतरण का नेटवर्क ऑपरेट हो रहा था। इस मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। प्रारंभिक जांच में विदेशी फंडिंग, संदिग्ध प्रशिक्षण मॉड्यूल और ‘पॉल’ जैसे कोड नेम से काम करने वाले जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं का एक संगठित नेटवर्क होने के संकेत मिले हैं। मामला लालबाग थाना क्षेत्र का है। जांच में पाया गया कि मुख्य आरोपी डेविड चाको अमेरिका में पढ़ाने का काम करता था। भारत लौटने के बाद उसे बड़ी रकम मिली थी। पुलिस यह जांच कर रही है कि यह पैसा किस रास्ते से भारत आया, किन बैंक खातों में जमा हुआ और डॉलर को रुपए में कैसे बदला गया। पुलिस को शक है कि इस पैसे का इस्तेमाल स्थानीय स्तर पर धर्मांतरण की गतिविधियों में किया गया। आरोपी के कब्जे से कई संदिग्ध पुस्तकें और प्रशिक्षण सामग्री जब्त भी की गई है। जब्त की गई किताबों में इस्तेमाल किए गए खास कोड, अलग-अलग शब्दों और प्रचार के तरीकों की विशेषज्ञों से जांच कराई जा रही है, ताकि इनके असली मकसद को समझा जा सके। जांच में यह भी सामने आया है कि दिसंबर 2025 में ग्राम पनेका में चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया था। जिसमें राज्य के अन्य जिलों से भी उच्च पदस्थ पदाधिकारी शामिल हुए थे। जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोगों को ‘पॉल’ जैसे नाम दिए गए थे। उन्हें भुगतान करने के लिए ट्रैवल वाउचर का इस्तेमाल किया जाता था। देखिए पहले ये 3 तस्वीर- जोनल कमांडरों को नोटिस जारी करने की तैयारी पुलिस यह पता लगा रही है कि यह भुगतान ऑनलाइन होता था या नकद, और पैसा कहां से आता था। इसके अलावा पुलिस ने संस्था के मुख्य कार्यालय और उसके काम करने के तरीके की पहचान कर ली गई है। अब पुलिस इस संस्था से जुड़े जोनल कमांडर, जोनल लीडर और अन्य बड़े पदों पर बैठे लोगों को नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुलाने की तैयारी कर रही है। अब सिलसिलेवार पढ़िए धर्मांतरण नेटवर्क की पूरी कहानी दरअसल, 8 जनवरी को ग्राम धर्मापुर से एक लिखित शिकायत मिली थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि एक व्यक्ति अवैध रूप से आश्रम और चर्च चला रहा है। आश्रम में नाबालिग बच्चों को रखा जा रहा है। कथित तौर पर धर्मांतरण की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसके बाद राजनांदगांव SP अंकिता शर्मा की टीम एक्टिव हुई। SP और नगर पुलिस अधीक्षक वैशाली जैन की टीम ने छापेमारी की। आश्रम से कांकेर के बच्चों को रेस्क्यू कर CWC (Child Welfare Committee) को सौंपा गया। इसके बाद CWC ने बच्चों परिजनों को सौंप दिया है। प्रोजेक्टर लगाकर करते थे ब्रेनवॉश पुलिस के अनुसार, छापेमारी के दौरान आश्रम से सोलर-आधारित प्रोजेक्टर्स जब्त किए गए हैं, जिनकी कीमत हजारों डॉलर बताई जा रही है। इन प्रोजेक्टर्स का उपयोग विशेष रूप से उन सुदूर वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों में किया जाता था, जहां बिजली की सुविधा नहीं है। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए हैं। इनमें लैपटॉप, टैबलेट, आई-पैड, प्रीमियम मोबाइल फोन, धर्मांतरण से संबंधित डिजिटल दस्तावेज, प्रेजेंटेशन सामग्री, महत्वपूर्ण रजिस्टर और फाइनेंशियल रिकॉर्ड शामिल हैं। डिजिटल प्रेजेंटेशन दिखाकर लोगों का ब्रेनवॉश किया जाता था। दोषियों पर होगी कठोर कार्रवाई- SP पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने कहा कि मामले की जांच गंभीरता से की जा रही है। विदेशी फंडिंग से लेकर प्रशिक्षण मॉड्यूल के उद्देश्यों तक हर कड़ी को जोड़ा जा रहा है। साक्ष्यों के आधार पर जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ………………………… यह खबर भी पढ़ें… 200 घरों में धर्मांतरण और चर्च खोलने की थी तैयारी: राजनांदगांव से ऑपरेट हो रहा था रैकेट, बच्चे-बच्चियों को आश्रम में रखा, विदेशी-फंडिंग का शक छत्तीसगढ़ में राजनांदगांव जिले से धर्मांतरण का नेटवर्क ऑपरेट हो रहा था। धर्मापुर गांव में अवैध चर्च और आश्रम को ठिकाना बनाया था। यहीं से डिजिटल तरीके से नेटवर्क चलता था। आश्रम में नाबालिग बच्चे-बच्चियों को भी रखा गया था। मामला लालबाग थाना क्षेत्र का है। पढ़ें पूरी खबर…


