जगराओं में श्मशान घाट में शव दफनाने पर विवाद:मोहल्ला कमेटी ने जताई आपत्ति, कहा- केवल दाह संस्कार की अनुमति

जगराओं शहर के साइस कॉलेज के पास स्थित श्मशान घाट में उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब एक परिवार ने अपने बुजुर्ग व्यक्ति के शव को दफनाने की तैयारी शुरू की। परिवार ने श्मशान घाट में गड्ढा खोदकर शव दफनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। मामले की जानकारी मिलते ही मोहल्ला कमेटी के सदस्य मौके पर पहुंचे और शव दफनाने पर आपत्ति जताई। कमेटी सदस्यों ने कहा कि श्मशान घाट में केवल अंतिम संस्कार (दाह संस्कार) किया जा सकता है, लेकिन कब्र बनाना या शव दफनाना नियमों के खिलाफ है। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हुई, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस दौरान लोगों ने सवाल उठाया कि जब उनसे श्मशान घाट के नाम पर पैसे लिए जाते रहे हैं, तो अब शव दफनाने से क्यों रोका जा रहा है। मौके पर मौजूद पूर्व पार्षद अमरनाथ कल्यान ने स्पष्ट किया कि श्मशान घाट में लिए जाने वाले पैसे लकड़ी की पर्ची के होते हैं, न कि किसी प्रकार का चंदा। केवल दाह संस्कार की अनुमति जानकारी के अनुसार, रानी वाला खूह के नजदीक राजस्थान से आकर कुछ परिवार लंबे समय से रह रहे हैं, जो अन्य धर्म को मानते हैं। इन्हीं परिवारों में से एक बुजुर्ग की मौत के बाद परिवार शव लेकर साइस कॉलेज के पास बने श्मशान घाट पहुंचा था। घटना की सूचना मिलने पर पार्षद मेषी सहोता भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने दोनों पक्षों की बातें सुनीं और कहा कि सभी धर्मों का सम्मान किया जाना चाहिए। हालांकि, मोहल्ला कमेटी का स्पष्ट कहना था कि श्मशान घाट में केवल दाह संस्कार की अनुमति है, दफनाने की नहीं। शव को दूसरी जगह दफनाने पर राजी हुआ परिवार पार्षद मेषी सहोता ने परिवार को लकड़ी उपलब्ध कराने की पेशकश भी की, यदि लकड़ी के लिये पैसे नहीं हैं तो वह अपनी जेब से पैसे भर देंगे। लेकिन परिवार ने दाह संस्कार करने से इनकार करते हुए शव दफनाने पर ही जोर दिया। अंततः समझाने के बाद परिवार शव को कहीं और दफनाने के लिए ले जाने को राजी हो गया। श्मशान घाट से जाने से पहले परिवार ने खुद ही खोदे गए गड्ढे को मिट्टी से भर दिया।

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