अनूपपुर कलेक्ट्रेट में मंगलवार की जनसुनवाई में दो बड़े मामले सामने आए। एक तरफ नसबंदी ऑपरेशन फेल होने से परेशान महिला न्याय मांगने पहुंची, तो दूसरी तरफ एक दिव्यांग किसान अपनी जमीन के मुआवजे के लिए गुहार लगाता नजर आया। कोतमा तहसील के थानगांव की रहने वाली 27 वर्षीय चांदनी केवट ने स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही उजागर की है। चांदनी ने बताया कि उनके पहले से दो बच्चे हैं, जिसके चलते उन्होंने साल 2022 में कोतमा स्वास्थ्य केंद्र में परिवार नियोजन (एलटीटी ऑपरेशन) करवाया था। विभाग ने उन्हें सफल ऑपरेशन का सर्टिफिकेट भी दिया था, लेकिन अब तीन साल बाद वह फिर से गर्भवती हो गई हैं। मुआवजे की मांग और आर्थिक मानसिक परेशानी चांदनी का कहना है कि तीन महीने की गर्भवती होने की पुष्टि होने के बाद से उनका परिवार मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान है। उन्होंने इसे पूरी तरह से डॉक्टर्स की विफलता बताया है। इस मामले पर कलेक्टर हर्षल पंचोली ने इसे गंभीरता से लेते हुए जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMHO) को तुरंत उचित सलाह और नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जमीन ले ली पर नहीं दिया मुआवजा इसी जनसुनवाई में ग्राम रक्सा के दिव्यांग किसान रामदीन राठौर भी अपनी फरियाद लेकर पहुंचे। रामदीन का आरोप है कि ‘न्यूजोन कंपनी’ ने पावर प्लांट लगाने के लिए उनकी करीब 7 एकड़ जमीन अधिग्रहित की थी, लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी उन्हें मुआवजे की फूटी कौड़ी नहीं मिली है। अधिग्रहित जमीन पर किसान ने दी खेती शुरू करने की चेतावनी रामदीन ने बताया कि वह पहले भी अधिकारियों और कंपनी के सामने अपनी मांग रख चुके हैं और 7 दिन का अल्टीमेटम भी दे चुके हैं। किसान का कहना है कि अगर प्रशासन और कंपनी जल्द ही उनके खाते में मुआवजे की राशि ट्रांसफर नहीं करते हैं, तो वह अपनी अधिग्रहित जमीन पर फिर से खेती करना शुरू कर देंगे। कलेक्टर ने इस मामले में भी जांच के निर्देश दिए हैं।


