सारंगपुर के टिकोद मंडल के अंतर्गत ग्राम जबरदी मर में स्थित श्याम मंदिर परिसर में एक विशाल हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं और ग्रामीण शामिल हुए। इस सम्मेलन का मुख्य जोर समाज में सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद को जगाने पर था। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और संघ के विभाग कार्यवाह धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले सौ वर्षों से समाज को जोड़ने और देश सेवा के काम में लगा है। उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’ के बारे में बताते हुए कहा कि अगर हर व्यक्ति खुद को बदले, तो परिवार, समाज और पर्यावरण में अपने आप सकारात्मक बदलाव आएगा। उन्होंने सभी से राष्ट्रहित में काम करने की अपील की। हिंदुत्व: धर्म नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका सम्मेलन में पंडित सागर शास्त्री ने हिंदुत्व की गहराई को समझाते हुए कहा कि यह केवल एक धार्मिक पहचान नहीं है, बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति है। यह हमें हमारे संस्कारों और कर्तव्यों का एहसास कराती है। उन्होंने जोर दिया कि नई पीढ़ी को अपनी भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना बेहद जरूरी है। मातृशक्ति और संस्कारों की रक्षा पर जोर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रेखा गुर्जर ने महिलाओं की भूमिका पर बात की। उन्होंने कहा कि महिलाएं केवल संस्कार ही नहीं, बल्कि मर्यादा भी सिखाती हैं। उन्होंने चिंता जताई कि आज की युवा पीढ़ी पश्चिमी सभ्यता की नकल में अपनी जड़ों से दूर हो रही है। उन्होंने बहनों और बेटियों से अपनी मर्यादा को बचाए रखने और स्वदेशी अपनाने का आह्वान किया। सशक्त और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प कार्यक्रम के आखिर में वहां मौजूद सभी लोगों ने ‘पंच परिवर्तन’ को अपने जीवन में उतारने की कसम खाई। सभी ने एक सुर में संकल्प लिया कि वे एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपना पूरा योगदान देंगे।


