अपनी कार से इंदौर के सराफा जाता था करोड़पति भिखारी:कारोबारियों को बांट रखे हैं 4 लाख रुपए, 10% प्रतिदिन ब्याज वसूलता था

इंदौर का करोड़पति भिखारी मांगीलाल दिन के उजाले में नहीं, बल्कि रात के अंधेरे में सराफा बाजार में सक्रिय होता था। यहां वह कार से जाता और भीख मांगने के साथ ब्याज वसूली का काम करता था। अब तक की जांच में सामने आया है कि मांगीलाल ने दिहाड़ी व्यापारियों, ठेले वालों और जरूरतमंद दुकानदारों को तीन से चार लाख रुपए ब्याज पर दे रखे थे। वह 10% प्रतिदिन के हिसाब से ब्याज वसूलता था। यानी किसी ने 1000 रुपए उधार लिए, तो अगले दिन उसे 1100 रुपए चुकाने पड़ते थे। महिला एवं बाल विकास विभाग के अफसरों को सूदखोरी और भिक्षावृत्ति की सूचना मिली थी। अफसर उसे पकड़ने के लिए डेढ़ महीने से मशक्कत कर रहे थे। जब उसे पकड़ा गया तो संपत्ति का खुलासा हुआ। अफसरों ने बताया उसने कई मजबूर लोगों को अपने चंगुल में फंसा रखा था। प्रशासन अब उसके इस पूरे लेन-देन के नेटवर्क की जांच कर रहा है। बता दें, इंदौर में फरवरी 2024 से भीख मांगना प्रतिबंधित है। जो लोग भिक्षावृत्ति में शामिल होते हैं, उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के साथ उनकी काउंसलिंग की जाती है। मांगीलाल के बारे कई दिनों से अफसरों को शिकायत मिल रही थी। अब उसे छुड़ाने के लिए परिजन ने अफसरों को फोन भी लगाए हैं। आखिर मांगीलाल को पकड़ने के लिए अफसरों ने कैसे जाल बिछाया और उसने पूछताछ में क्या बताया है। पढ़िए रिपोर्ट… डेढ़ महीने की लुका-छिपी और रात का ‘ऑपरेशन’
इस पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे रेस्क्यू नोडल अधिकारी दिनेश मिश्रा ने बताया कि उनकी टीम को करीब डेढ़ महीने से लगातार यह सूचना मिल रही थी कि 60-65 साल का एक व्यक्ति रात के अंधेरे में सराफा की गलियों में भीख मांगता है। मुखबिरों ने बताया था कि वह दिन में कभी नजर नहीं आता, बल्कि रात 9:30 से 10 बजे के बाद ही सक्रिय होता है। उसकी पहचान लकड़ी की स्लाइडर गाड़ी थी, जिस पर बैठकर वह खुद को घसीटता था। सूचना के आधार पर टीम ने दो-तीन बार मौके पर जाकर निगरानी की, लेकिन हर बार वह उनके पहुंचने से पहले चला जाता था। उसे पकड़ना एक चुनौती बन गया था। प्रॉपर्टी और गाड़ियों का मालिक निकला मांगीलाल
शुरुआती पूछताछ में उसने अपना नाम मांगीलाल बताया और खुद को अलवासा क्षेत्र का निवासी बताया। जब तक वह सिर्फ एक आम भिखारी लग रहा था, लेकिन असली कहानी तो इसके बाद शुरू होनी थी। जब अधिकारियों ने मांगीलाल से उसकी आर्थिक स्थिति और परिवार के बारे में पूछताछ शुरू की, तो सभी के होश उड़ गए। मांगीलाल ने बताया कि उसके पास शहर में पक्के मकान हैं। उसके पास एक कार है, जिसे वह किराए पर भी चलवाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि इसी कार से वह रात में भीख मांगने के लिए सराफा आता था। इसके अलावा, उसके पास तीन ऑटो रिक्शा भी हैं, जिन्हें उसने किराए पर दे रखा है, जिससे उसे हर महीने एक बंधी-बंधाई रकम मिलती है। अधिकारियों ने जब पूछा कि यह सब संपत्ति उसने कैसे बनाई, तो उसका जवाब था- भीख मांगकर। बीमारी को बनाया हथियार, संवेदनाओं से खेला
मांगीलाल सिर्फ एक धोखेबाज ही नहीं, बल्कि मनोविज्ञान का माहिर खिलाड़ी भी था। वह जानता था कि लोगों की संवेदनाओं को कैसे भुनाना है। उसके हाथों में कुष्ठ रोग के शुरुआती लक्षण हैं। इसी बीमारी को उसने अपनी भिक्षावृत्ति का सबसे बड़ा हथियार बनाया। वह जानबूझकर अपने हाथों में जूते पहन लेता था, ताकि उसकी बीमारी और विकृति साफ तौर पर नजर आए। लकड़ी की स्लाइडर गाड़ी पर बैठकर जब वह सराफा की गलियों में घूमता, तो उसकी दयनीय हालत देखकर लोगों का दिल पसीज जाता। लोग बिना कुछ सोचे-समझे उसे 40, 50 या 100 रुपए तक दे देते थे। परिजन ने शुरू की छुड़ाने की कवायद
मांगीलाल के पकड़े जाने की खबर जैसे ही उसके परिवार तक पहुंची, उसे छुड़ाने की कोशिशें भी शुरू हो गईं। अधिकारियों ने बताया कि मांगीलाल के भतीजे ने उन्हें फोन किया और पूछा कि उसे कैसे छुड़वाया जा सकता है। परिवार वालों ने अधिकारियों से पूरी जानकारी ली है और जल्द ही मिलने की बात कही है। मांगीलाल के बुजुर्ग माता-पिता उसी के साथ रहते हैं। उसके दो भाई भी हैं, जो अलग रहते हैं। यह बात भी हैरान करने वाली है कि क्या उसके परिवार को उसकी इस काली सच्चाई के बारे में पता नहीं था, या वे भी इस धोखे के खेल में शामिल थे। कलेक्टर ने दिए सख्त जांच के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने भी सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने अधिकारियों को इस पूरे मामले की गहन जांच के आदेश दिए हैं। कलेक्टर वर्मा ने कहा, “जांच रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। इंदौर शहर में भिक्षावृत्ति पूरी तरह प्रतिबंधित है और इस तरह की गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” बता दें कि फरवरी 2024 से इंदौर में भिक्षावृत्ति मुक्त अभियान शुरू किया गया। शुरुआती सर्वे में 6500 भिक्षुक सामने आए थे। प्रशासन ने 4500 भिक्षुक की काउंसलिंग कर उन्हें भीख मांगने से रोका। वहीं 1600 का रेस्क्यू कर उज्जैन में सेवाधाम आश्रम भेजा। इसके अलावा 172 बच्चों का स्कूलों में प्रवेश कराया गया, तो 800 लोगों की काउंसलिंग कर पुनर्वास कराया गया। ये खबर भी पढ़ें…
इंदौर का करोड़पति भिखारी…तीन मकान, कार और ऑटो का मालिक इंदौर के सराफा बाजार में वर्षों से भीख मांग रहा मांगीलाल असल में करोड़ों की संपत्ति का मालिक निकला। यह खुलासा तब हुआ, जब महिला एवं बाल विकास विभाग ने भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के तहत उसे रेस्क्यू किया। पढ़ें पूरी खबर…

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