मध्य प्रदेश के इंदौर और उसके आसपास हाल ही में हुए दो हादसों ने कार सेफ्टी सिस्टम, खासकर एयरबैग की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोनों हादसों में गाड़ियां तेज रफ्तार में थीं और कार के एयरबैग खुलने के बावजूद अंदर बैठे लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इन हादसों से साफ है कि सिर्फ एयरबैग या सामान्य सेफ्टी फीचर ही जान बचाने के लिए काफी नहीं होते। तेज रफ्तार, गाड़ी की बनावट, टक्कर का तरीका और सड़क की हालत भी मिलकर हादसे की गंभीरता तय करते हैं। इन घटनाओं ने लोगों में डर और चिंता बढ़ाई है। साथ ही यह संकेत भी दिया है कि कार कंपनियों और ट्रैफिक विभाग को सुरक्षा नियमों और लोगों को जागरूक करने पर ज्यादा गंभीरता से काम करना चाहिए। पहला हादसा: रालामंडल बायपास, 9 जनवरी
9 जनवरी की रात रालामंडल बायपास पर तेज रफ्तार कार सड़क किनारे खड़े डंपर में जा घुसी। कार में सवार तीन युवाओं की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में पूर्व गृहमंत्री बाला बच्चन की बेटी प्रेरणा बच्चन (26), कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता आनंद कासलीवाल के बेटे प्रखर कासलीवाल (25) और उनके साथी मानसंधु (26) शामिल थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार की रफ्तार 130 से 140 किमी प्रतिघंटा के बीच थी और ड्राइवर शराब के नशे में था। टक्कर के बाद कार के सभी छह एयरबैग खुल गए, लेकिन इसके बावजूद तीन लोगों की जान चली गई। दूसरा हादसा: इंदौर-देवास बायपास, 17 जनवरी
17 जनवरी को तड़के इंदौर-देवास बायपास पर तेज रफ्तार कार आगे चल रहे ट्रक में पीछे से जा घुसी। हादसे में कार सवार ट्रांसपोर्टर विक्रम सिंह राणा की मौके पर ही मौत हो गई। राणा का सिर और गर्दन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। गर्दन स्टीयरिंग में फंस गई थी। कार के दो फ्रंट एयरबैग खुले, लेकिन उनकी जान नहीं बचा सके। पुलिस का अनुमान है कि कार की रफ्तार 100 किमी प्रतिघंटा से ज्यादा थी। हादसे में कार के अगले हिस्से को काटकर शव बाहर निकालना पड़ा था। सवाल- एयरबैग काम क्यों नहीं आए?
दैनिक भास्कर ने इस मुद्दे पर ऑटोमोबाइल सेफ्टी एक्सपर्ट संजय बागरिया से बात की। उनका साफ कहना है कि एयरबैग कोई गारंटी नहीं हैं कि हर एक्सीडेंट में जान बच ही जाएगी। अगर स्पीड बहुत ज्यादा है, तो टक्कर के दौरान शरीर पर पड़ने वाला फोर्स इतना अधिक होता है कि एयरबैग भी उसे संभाल नहीं पाते। कमजोर स्ट्रक्चर भी बड़ा खतरा
संजय बागरिया बताते हैं कि अगर गाड़ी का स्ट्रक्चर मजबूत नहीं है, तो एयरबैग भी बेअसर हो जाते हैं। टक्कर के समय कमजोर बॉडी स्ट्रक्चर मुड़ जाता है, केबिन कम्प्रेस्ड हो जाता है और यात्री सीधे गंभीर चोट की चपेट में आ जाते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बढ़ती महंगाई के कारण कई कंपनियां लागत घटाने के लिए स्ट्रक्चर में कॉस्ट कटिंग करती हैं। अगर स्ट्रक्चर मजबूत और एयरबैग हाई क्वालिटी के दिए जाएं तो गाड़ी महंगी हो जाती है और मिडिल क्लास खरीदार उसे लेने से कतराता है। साइज से अलग एलॉय व्हील भी एक कारण
सेफ्टी एक्सपर्ट्स यह भी चेतावनी देते हैं कि कुछ अन्य कारणों से भी गाड़ियों का स्ट्रक्चर बदल जाता है। इनमें कंपनी द्वारा दिए गए व्हील साइज से अलग एलॉय व्हील लगाना, एलॉय व्हील में बैलेंसिंग की गड़बड़ी और स्पेयर व्हील और एलॉय साइज में फर्क शामिल हैं। इन कारणों से गाड़ी अनबैलेंस्ड हो सकती है, जिससे तेज रफ्तार में कंट्रोल खोने का खतरा बढ़ जाता है। ये खबर भी पढ़ें… बोनट पर लटका था पूर्व गृहमंत्री की बेटी का शव इंदौर में हुए भीषण सड़क हादसे में पूर्व गृहमंत्री बाला बच्चन की बेटी प्रेरणा बच्चन (26) की मौत हो गई। पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, 130–140 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से कार चला रहा युवक शराब के नशे में था। डंपर की टक्कर से पीछे की सीट पर बैठी प्रेरणा उछलकर बोनट पर जा गिरीं, बाद में उनका शव वहीं मिला। पढ़ें पूरी खबर…


