बीआरएस नगर रोड, सराभा नगर, किचलू नगर, हंबड़ा रोड सड़क कमर्शियल करने का प्रस्ताव पास

नगर निगम ने जनता की राय लिए बिना रिहायशी इलाकों की प्रमुख सड़कों को कमर्शियल घोषित करने की अंदरखाते पूरी तैयारी कर ली है। हैरानी की बात यह है कि इन सड़कों को कमर्शियल करने का मसौदा न केवल पास किया गया है, बल्कि सरकार को भी भेजा जा चुका है। अब किसी भी वक्त सरकार का नोटिफिकेशन जारी हो सकता है। फैसले से रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ना तय है। इसके तहत सग्गू चौक से हंबड़ां रोड तक की मेन सड़क को कमर्शियल घोषित करने की सिफारिश की गई है। इसी तरह मल्हार रोड से एक प्रमुख कॉफी कंपनी की ओर, किप्स मार्केट तक जाने वाली मेन सड़क को भी कमर्शियल बनाने की तैयारी है। बिल्डिंग ब्रांच ने सिधवां नहर पुल से लेकर बीआरएस नगर की मेन सड़क को भी कमर्शियल घोषित करने का प्रस्ताव पास करवा लिया है। इस सड़क पर एक आपत्ति जरूर आई थी, लेकिन उसे भी अंदरखाते निपटाकर सरकार से नोटिफिकेशन जारी करवाने की तैयारी कर ली है। गौरहोकि नगर निगम के अधिकारियों की अगुवाई में बनी टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी ने पहले ही अपने स्तर पर प्रस्ताव पास किया था। -एक माह पहले पब्लिक नोटिस अखबारों में छपा था। सिर्फ बीआरएस नगर की सड़क को लेकर दो आपत्तियां आई हैं। बाकी सड़कों को लेकर कोई एतराज नहीं आया। प्रस्ताव सरकार को भेज दिया गया है। -हरविंदर सिंह, एटीपी, जोन-डी बिल्डिंग ब्रांच ने नोटिस बोर्ड पर भी नहीं लगाए पब्लिक नोटिस, लोगों से डोर टू डोर राय तक नहीं ली – पहले से इन सड़कों पर रहता है ट्रैफिक जाम टीपी स्कीम की धज्जियां उड़ाईं: बीआरएस नगर, किचलू नगर और सराभा नगर टीपी स्कीम के तहत विकसित की गई कॉलोनियां हैं। यहां रिहायशी, कमर्शियल, स्कूल, धार्मिक स्थल, मार्केट और ग्रीन एरिया पहले से तय किए गए थे। लेकिन बीआरएस नगर की मेन सड़क पर रिहायशी इमारतों को अवैध तरीके से कमर्शियल बनने दिया गया। नतीजा यह रहा है कि आज वहां 3 से 4 मंजिला बड़े कमर्शियल कॉम्प्लेक्स खड़े हैं और इनमें पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं हैं, जबकि सड़क पर पार्किंग होने से झगड़े और हर समय जाम के हालात बने रहते हैं। किचलू नगर, हंबड़ां रोड: सग्गू चौक से हंबड़ां रोड तक दोनों ओर रिहायशी कॉलोनियां हैं। किचलू नगर टीपी स्कीम के तहत होने के बावजूद वहां अवैध कमर्शियल इमारतें बन चुकी हैं। किचलू नगर कट के पास हालात इतने खराब हैं कि लोग रोजाना जाम से जूझते नजर आते हैं। सड़क कमर्शियल घोषित करने पर स्थिति और बदतर होगी। सराभा नगर में मल्हार रोड से किप्स मार्केट की ओर जाने वाली सड़क पूरी तरह रिहायशी एरिया में आती है। यहां लोग पहले से कमर्शियल किए जाने का विरोध कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज नजरअंदाज की जा रही है। न पब्लिक नोटिस, न डोर-टू-डोर राय: सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि निगम ने लोगों को जानकारी ही न मिले, इसके लिए पब्लिक नोटिस को सही तरीके से सार्वजनिक नहीं किया। न तो निगम दफ्तर के नोटिस बोर्ड पर नोटिस लगाया और न ही डोर-टू-डोर जाकर लोगों से आपत्तियां ली गईं। अगर नोटिस खुलकर सामने आता तो सैकड़ों एतराज सामने आ सकते थे। निगम अब सरकार से नोटिफिकेशन जारी करवाने की स्थिति में पहुंच चुका है। ट्रैफिक पुलिस को भी अंधेरे में रखा: सड़कों को कमर्शियल करने की जानकारी ट्रैफिक पुलिस से भी साझा नहीं की गई। ऐसे में आने वाले समय में रिहायशी इलाकों में बढ़ने वाला ट्रैफिक और जाम ट्रैफिक पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनने वाला है। गौरतलब है कि इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने इन इलाकों में पहले से कमर्शियल मार्केट बनाई थीं, लेकिन निगम को कॉलोनियां हैंडओवर होने के बाद अवैध कमर्शियल निर्माण को बढ़ावा मिला। इसका नतीजा यह है कि पुरानी मार्केट में आज तक दुकानें नहीं बिक पाई हैं। टीपी स्कीम का उद्देश्य संतुलित विकास जब टीपी स्कीम के तहत बनी रिहायशी कालोनियों को निगम कमर्शियल कर देगा तो वहां रहने वाले लोगों को कोई रिहायशी इलाका ही बता दें ताकि लोग वहां से अपने मकान बेचकर रिहायशी कालोनी में चैन से रह सकें। बिना ट्रैफिक स्टडी, पार्किंग प्लान, सार्वजनिक सहमति के रिहायशी सड़कों को कमर्शियल घोषित करना शहरी नियोजन के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। टीपी स्कीम का उद्देश्य संतुलित विकास होता है न कि अवैध निर्माण को बाद में वैध ठहराना। ऐसे फैसलों से ट्रैफिक, प्रदूषण, नागरिक सुविधाओं पर भारी दबाव पड़ेगा। अगर जनता की राय और ट्रैफिक पुलिस की रिपोर्ट नजरअंदाज हुई तो भविष्य में ये क्षेत्र रहने लायक नहीं बचेंगे। राहुल, ट्रैफिक एडवाइजर

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