आदिवासी छात्रावासों को योग केंद्र जैसा विकसित करेंगे

भास्कर न्यूज | डौंडी छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी शहीद गैंदसिंह नायक की 201वीं शहादत दिवस मंगलवार को हल्बा समाज के तत्वावधान में डौंडी ब्लॉक के ग्राम नर्राटोला हवाई अड्डा परिसर में मनाई गई। इस अखिल भारतीय स्तरीय कार्यक्रम में देश के पांच राज्यों से सामाजिक प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने शहीद गैंदसिंह नायक को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि जनजातीय समाज सरल, समर्पित और संघर्षशील रहा है। शहीद गैंदसिंह नायक केवल जल, जंगल और जमीन के लिए ही नहीं, बल्कि देश की एकता और संप्रभुता के लिए भी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज बने। सन 1825 के विद्रोह में उन्होंने अबूझमाड़ की अस्मिता की रक्षा के लिए अंग्रेजों द्वारा लगाए गए मनमाने करों के विरुद्ध संघर्ष किया और माड़िया जनजाति को गोरिल्ला युद्ध का प्रशिक्षण दिया। मंत्री वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इतिहास में दबे हुए जननायकों को सामने लाकर उन्हें सम्मान दिलाने का कार्य किया है। उन्होंने सामाजिक लोगों की मांग पर भवन निर्माण के लिए राशि प्रदान करने का आश्वासन भी दिया। कार्यक्रम के अंत में समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंतूराम पवार के निवेदन पर मंत्री वर्मा ने एक छत्तीसगढ़ी गीत भी प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने सराहा। छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष रूपनारायण सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि आदिवासी समाज तेजी से प्रगति कर रहा है और आने वाले समय में सभी आदिवासी छात्रावासों को योग केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने कहा कि आदिवासी सपूतों के नाम इतिहास में दबा दिए गए थे, जबकि भारत की आजादी की लड़ाई में आदिवासी समाज की अग्रणी भूमिका रही है। उन्होंने शहीद वीर नारायण सिंह, बिरसा मुंडा और शहीद गेंदसिंह नायक को याद करते हुए कहा कि डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ में आदिवासियों को 32 प्रतिशत आरक्षण मिला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाकर आदिवासी समाज को गौरव प्रदान किया।

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