सोलर नीति पर सरकार के ही नियम भारी पड़ रहे हैं। एक तरफ सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सरकार 78 हजार रुपए तक की सब्सिडी दे रही है, वहीं दूसरी ओर बिजली कंपनी के फिक्स चार्ज उपभोक्ताओं को भारी पड़ रहे हैं। इंदौर शहर में कुल 22,500 सोलर प्लांट हैं। इनमें से 1500 उपभोक्ताओं के बिजली बिलों का विश्लेषण किया तो पता चला कि सालाना 7 से 9 हजार रु. फिक्स चार्ज वसूला जा रहा है। इससे जिस सोलर प्लांट की लागत 5 साल में वसूल हो सकती थी, वह 8 साल तक पर पहुंच गई है। अगर सोलर प्लांट की लाइफ 20 साल मानें तो आधी सब्सिडी तो कंपनी फिक्स चार्ज में ही वसूल रही है। सोलर नीति के तहत दिन में उपभोक्ता अपने प्लांट से बनी बिजली कंपनी को एक्सपोर्ट करता है, जबकि रात में ग्रिड से इम्पोर्ट करता है। अगर नेट मीटरिंग में दिन और रात की यूनिट बराबर हैं, तो फिक्स चार्ज भी जीरो होना चाहिए। अगर इम्पोर्ट ज्यादा है तो नेट यूनिट पर ही फिक्स चार्ज लगना चाहिए। इधर, घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली कंपनी 8 रुपए प्रति यूनिट दर से बिजली बेच रही है, वहीं कंपनी सोलर उपभोक्ताओं से अतिरिक्त बिजली सिर्फ 2.16 रुपए प्रति यूनिट में खरीद रही है। 7-9 हजार फिक्स चार्ज- नतीजा प्लांट की लागत 8 साल में वसूल हो रही केस 1: 567 यूनिट कंपनी को दी फिर भी 840 रुपए फिक्स चार्ज
मैकेनिक नगर जोन के एक उपभोक्ता के यहां 567 यूनिट बिजली बनी और 445 यूनिट ही खपत की। फिक्स चार्ज 840 रुपए चुकाने पड़े। केस 2: 100 यूनिट ज्यादा बिजली बनाई, 784 रुपए फिर भी भरने पड़े
सत्य साई जोन के एक उपभोक्ता के बिल में 517 यूनिट बिजली एक्सपोर्ट की गई और 410 यूनिट इम्पोर्ट की गई। यानी 100 यूनिट ज्यादा बिजली बनाई। फिर भी 784 रुपए का बिल देना पड़ा। केस 3: 308 रुपए फिक्स चार्ज
संगम नगर क्षेत्र के उपभोक्ता ने 225 यूनिट बनाई और खपत सिर्फ 153 यूनिट की रही। 308 रुपए फिक्स चार्ज अनिवार्य रूप से वसूला गया।


