भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले में मंगलवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। निगम की ओर से कहा गया कि वहां शौचालय की वजह से लाइन में दूषित पानी मिल रहा था। उसे ठीक कर दिया गया है। इस पर जस्टिस विजय कुमार शुक्ला, जस्टिस आलोक अवस्थी की डिविजन बेंच ने पूछा कि आप 100 फीसदी दावा कर रहे हैं क्या? इस पर निगम ने कहा कि केवल शौचालय ही नहीं, कुछ और भी वजहें हैं। वहां सकरी गलियां हैं, ड्रेनेज और पानी की लाइन भी साथ-साथ हैं। कोर्ट ने फिर सवाल किया कि क्या आप यह भी दावे के साथ कह रहे हैं कि ड्रेनेज का पानी मिलने से ही लोगों की मौत हुई है? इस पर निगम की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। पिछली सुनवाई पर अतिरिक्त महाधिवक्ता और मुख्य सचिव के बीच मौतों के आंकड़ों को लेकर असमंजस की स्थिति थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट अजय बागड़िया, मनीष यादव, रितेश इनानी, अनिल ओझा पैरवी कर रहे हैं। कोर्ट ने सीएस से पूछा- आप यहां अपनी ही रिपोर्ट पढ़ रहे हैं, शिकायत की क्या व्यवस्था है बताएं? वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े मुख्य सचिव अनुराग जैन ने दोहराया कि हर सप्ताह जल सुनवाई की जा रही है। नगरीय विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे हर दिन की रिपोर्ट ले रहे हैं। हाई कोर्ट ने सवाल किया कि यह तो आप अपनी रिपोर्ट पढ़ रहे हैं। हमारा सवाल यह है कि पूरे शहर में गंदे पानी की शिकायतें सामने आ रही हैं। किसी व्यक्ति को शिकायत करना है तो उसकी क्या व्यवस्था है। सीएस ने कहा कि सीएम हेल्प लाइन, जल सुनवाई, 311 एप है। इसके बाद भी कोर्ट चाहे तो हम अतिरिक्त कमेटी बना सकते हैं। अब जागे: फटकार के बाद बनाई कमेटी हाईकोर्ट की नाराजगी के बाद राज्य शासन ने राज्य स्तरीय जांच कमेटी बनाई। इसमें अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन, संजय कुमार शुक्ल अध्यक्ष होंगे। प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, पी. नरहरि, आयुक्त, संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास, संकेत भोंडवे को सदस्य बनाया गया है। आयुक्त, इंदौर संभाग, सुदाम खाड़े को सदस्य-सचिव नामित किया गया है। समिति एक माह के भीतर राज्य शासन को जांच प्रतिवेदन देगी। पिछड़े: अपर कलेक्टर की रिपोर्ट नहीं आई मामले में की शुरुआत में ही एसीएस नीरज मंडलोई और संजय दुबे यहां पहुंचे थे। जिम्मेदारों से बात और भागीरथपुरा के दौरे के बाद ही निगमायुक्त को हटाया गया था। अपर आयुक्त और अधीक्षण यंत्री को सस्पेंड भी किया गया। कलेक्टर शिवम वर्मा ने अपर कलेक्टर पंवार नवजीवन विजय को जांच करने को कहा था लेकिन, अब तक वह रिपोर्ट नहीं आई है। आईसीएमआर की टीम अपनी रिपोर्ट पहले ही शासन स्तर पर दे चुकी है।


