ये संभाग मुख्यालय है। ऐसा मुख्यालय जहां केन्द्र में कानून मंत्री है। इसी जिले से प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। पांच से छह आईएएस अफ्सर हैं। सत्ता के 6 विधायक हैं। फिर भी ये शहर अनाथ सा महसूस कर रहा है। सिस्टम मानो शहर में है ही नहीं। जनता की समस्या को कोई सुनने या देखने वाला नहीं है। अगर आप पुलिस लाइन से आ रहे हैं और जूनागढ़ जाना है तो भुट्टों के चौराहे से आप राइट टर्न नहीं ले सकते। क्योंकि पुलिस ने अपनी मनमर्जी से बैरीकेड लगा दिया। इसके आगे श्रीगंगानगर चौराहे से आप टर्न लेना चाहो तो भी पुलिस ने यहां कीर्ति स्तंभ चौराहे की तरफ बेरीकेटिंग लगा दिए। अब दीनदयाल सर्किल से अगर कीर्ति स्तंभ चौराहे की ओर आना चाहो तो दो महीने से नगर निगम ने इस सड़क बंद कर रखा है। यानी आपको तीन से चार किलोमीटर का चक्कर लगाकर दुर्गादास सर्किल या म्यूजियम सर्किल से ही घूमकर आना होगा। सवाल ये कि जनता की ये परेशानी क्या पुलिस अधीक्षक को नहीं दिखती कि उनकी ट्रेफिक पुलिस कैसे अपनी मनमानी कर रही या कलेक्टर को नहीं दिखता कि एक सड़क दो महीने से बंद है और वहां सीवरेज का काम नहीं हो पाया। यही हालात जूनागढ़ में तीन फाटकों के पास है। यहां भी पब्लिक पार्क से आने वाले व्यक्ति को शार्दूल सिंह सर्किल से घूमकर आना पड़ता है और वहां जिस जगह से लोग टर्न लेते हैं वहां ठेले और टैक्सी वाले खड़े रहते हैं जिसके कारण वहां जगह नहीं बचती। भुट्टो का चौराहा यहां से कीर्ति स्तंभ चौराहे के लिए रोड़ निकलती है। पहले रोड़ टूटी थी। अब सीसी बन गई। रोड बनते ही पुलिस ने यहां बेरीकेटिंग लगा दी। तर्क दिया कि यहां मुड़ने से जाम लगता है मगर इसी चौराहे पर ट्रेफिक पुलिस के सिपाही रहते हैं। मगर उनका फोकस चालान पर होता है ट्रेफिक संभालने पर नहीं। इस कारण पुलिस को मेहनत ना करनी पड़ी इसलिए यहां बेरीकेटिंग लगा दिए और खुद चालान बनाने में व्यस्त हो गई। श्रीगंगानगर चौराहा चौराहे का मतलब ही होता है जहां चार रास्ते हों। श्रीगंगानगर चौराहे पर पुलिस का म्यूजियम सर्किल के बाद सबसे ज्यादा जमावड़ा रहता है मगर यहां भी पुलिस ने बेरीकेटिंग लगाकर कीिर्त स्तंभ जाने का रास्ता बंद कर दिया। अब पुलिस लाइन चौराहे से आने वाला व्यक्ति श्रीगंगानगर चौराहे तक आ गया मगर उसे मुड़ने के लिए जगह नहीं मिली। इस चौराहे पर तीन तरफ तो वाहनों की इतनी लम्बी कतारें होती है कि निकलना मुश्किल हो जाता है। दीनदयाल सर्किल इस चौराहे पर दो महीने पर सीवरेज फर्म ने गड्ढा खोदा। निगम के अधीक्षण अभियंता ने सवाल उठाया तो उन्हें 10 दिन में काम करने का भरोसा दिया। 20 दिन बीतने पर फिर सवाल उठा तो दो दिन में काम खत्म करने को कहा। उस बात को भी किए हुए 20 दिन बीत गए। निगम आयुक्त को पता है। कलेक्टर को पता है। भाजपा विधायक भी दो दिन पहले प्रेस कांफ्रेंस में गए तो घूमकर आए और प्रेस कांफ्रेंस में वे विकास की बातें कर रहे थे मगर किसी विधायक ने सवाल नहीं उठाया। 3 दिन तो वेटेरनरी चौराहा भी बंद रहा तीन दिन तक करणीसिंह स्टेडियम में कार्यक्रम होने से वेटेरनरी यूनिवर्सिटी और लालगढ़ होटल जाने वाले चौराहे पर भी करणीसिंह स्टेडियम की ओर आने वाले रास्ते को बंद कर दिया था। “दीनदयाल सर्किल पर कुछ काम में तकनीकी दिक्कत हो रही है। श्रीगंगानगर चौराहा, भुट्टों के चौराहों पर बेरीकेटिंग किसकी परमिशन से और क्यों लगाए इसके बारे में मुझे जानकारी नहीं है पर मैं जरूर कलेक्टर के समक्ष ये विषय रखूंगा।”
-मयंक मनीष, कमिश्नर, निगम आयुक्त पब्लिक पार्क तीन गेट पब्लिक पार्क की ओर से अगर किसी को जूनागढ़ जाना है तो तीन गेट से निकलते ही लोग जूनागढ़ की ओर नहीं मुड़ सकते। क्योंकि तीन गेट के पास खड़ी पुलिस की जीप में बैठे ट्रेफिक पुलिस कर्मियों को ट्रेफिक कंट्रोल करना पड़ेगा और वो कौन करे। इसलिए बेरीकेटिंग लगा दी। लोग शार्दूल सिंह सर्किल की ओर से मुड़कर आते हैं। उस सर्किल पर टेक्सी और ठेले इतनी तादाद में हैं वाहन मुड़ने में दिक्कत होती है।


