भागीरथपुरा में रहने वाले लोगों में घटना के इतने दिनों बाद भी पानी को लेकर डर का माहौल है। कई लोग आज भी इतने डरे हुए है कि वे आज भी पानी उबालकर और छानकर इस्तेमाल कर रहे हैं। डर का आलम यह है कि यहां जो मेहमान आ रहे हैं, वे भी यहां पानी नहीं पी रहे हैं। वहीं दूषित पानी के डर ने कई लोगों के घर का बजट तक बिगाड़ दिया है, क्योंकि उन्हें पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। वहीं पानी उबालने के कारण जो गैस की टंकी डेढ़ महीने चलती थी वह महीने भर में ही खत्म हो रही है। भागीरथपुरा में दूषित पानी ने 24 जिंदगियां छिन ली। सैकड़ों लोग अस्पताल तक पहुंच गए। अभी भी कई लोग अस्पताल में भर्ती है, जिनका इलाज चल रहा है। मगर दूषित पानी को लेकर लोगों के मन में जो डर बैठ गया है, उसे दूर होने में काफी समय लग सकता है। भागीरथपुरा की घटना को कुछ ही दिनों में महीनाभर हो जाएगा, लेकिन आज भी लोग यहां पानी का इस्तेमाल करने में घबरा रहे हैं। मेहमान आते हैं, लेकिन पानी नहीं पीते
इलाके में रहने वाली अर्चना यादव बताती हैं कि भागीरथपुरा की घटना के बाद लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। उनके घर मेहमान आते हैं, लेकिन पानी नहीं पीते। उन्होंने कहा कि मेहमान को बोलते हैं कि उबला पानी है, हम भी पीते हैं आप भी पी सकते हैं, लेकिन उनके मन में इतना डर है कि वे हमारे यहां पानी नहीं पीते। एक बार चाय पी लेंगे, लेकिन पानी नहीं पीते। हमें बुरा नहीं लगता है, लेकिन हर व्यक्ति अपनी सुरक्षा चाहता है, तो हम भी फोर्स नहीं करते। कल को किसी को कुछ हो जाए तो यहीं कहेंगे कि भागीरथपुरा गए थे, पानी पिया तो ऐसा हो गया। खरीदना पड़ रहा पानी, बजट भी बिगड़ा
यहां रहने वाली शोभा पाटिल ने बताया पानी के टैंकर आ रहे हैं। पानी को उबालकर-छानकर पीने के लिए अनाउंसमेंट भी कर रहे हैं, लेकिन हम आरओ का पानी खरीदकर पी रहे हैं। पानी को लेकर डर का माहौल बना हुआ है। नर्मदा की सप्लाई की, लेकिन हमने नल ही नहीं खोला। पीने के पानी के लिए आरओ का पानी खरीदकर ला रहे हैं। एक दिन में 60 रुपए का पानी लग रहा है। तीन केन खरीदना पड़ती है रोज की। इसके कारण खर्चे में भी इजाफा हो गया है। पानी के लिए अलग से खर्चा करना पड़ रहा है। जिसका असर बजट पर हुआ है। पोता भी गिर गया है, उसकी भी दवा चल रही है। पानी भी उबालकर इस्तेमाल करने के कारण गैस की टंकी भी जल्दी खत्म हो रही है। सुबह-शाम पानी गर्म करना पड़ता है, जो गैस टंकी पहले डेढ़ महीने चलती थी वह एक महीने में ही खत्म हो रही है। वहीं सुमित्रा गुर्जर ने बताया कि पानी का डर मन में बैठ गया है। कब गंदा पानी आ जाए और कब क्या हो जाए। डर तो बना हुआ है। पानी पीने में भी डर है। कब पानी कैसा आ जाए कोई भरोसा नहीं है। क्योंकि दूषित पानी के कारण उन्हें भी उल्टी-दस्त की परेशानी हुई थी। गंदे पानी का डर तो हमेशा के लिए बन गया है। पानी का इस्तेमाल तो उबालकर ही कर रहे हैं। आरओ का पानी और टैंकर का पानी उबालकर ही पी रहे है। खाना बनाने में जो पानी इस्तेमाल कर रहे हैं, उसे भी पहले उबालते हैं उसके बाद ही उस पानी को खाना बनाने में इस्तेमाल कर रहे हैं। हमने भी पीकर देखा पानी, जल्द शुरू हो जाएगी सप्लाई
क्षेत्रीय पार्षद कमल वाघेला ने बताया कि दो साल पहले ही निगम में लिखित में सप्लाई लाइन खराब होने की जानकारी दी थी। लाइन में कई जगह जंग लग गया है, टूट गई है। उसको बदलने की आवश्यकता है। पिछले 22 दिन में यहां पर लाइन का काम चल रहा है। जो अब पूरा होने की कगार पर है। निश्चित रूप से बड़ी घटना हुई है यहां। सतर्कता की जरूरत है, धीरे-धीरे लोगों में आत्मविश्वास लौटेगा। वैसे तो जनजीवन सामान्य हो गया है, लेकिन पानी को लेकर जो समस्या है उसे भी ठीक कर लेंगे। 50 टैंकर इलाके में चल रहे हैं और पीने का पानी सप्लाई किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जो तत्काल सैंपल की जो जानकारी आती है। क्लोरिन डालकर जो चेक करते है, उसमें पानी शत प्रतिशत पैरामीटर पर सफल है पानी पीने योग्य हैं। महापौर ने और मैंने बिना उबाले भी पानी पिया है। अभी भी चल रहा लाइन का काम, टैंकरों से जारी सप्लाई
इलाके में अभी भी कई जगह नर्मदा और ड्रेनेज लाइन का काम चल रहा है। हालांकि ये काम अब अंतिम चरणों में है। जल्द ही यहां पर लाइन का काम पूरा हो जाएगा। नर्मदा और ड्रेनेज लाइन के कारण इलाके में रोड़ की हालत जरूर खराब हो गई है, लोगों को काम के कारण आवाजाही में दिक्कत भी हो रही है। नर्मदा की लाइन का काम जल्द पूरा हो जाएगा, जिसके बाद इलाके में इस्तेमाल के लिए पानी की सप्लाई इस लाइन से शुरू की जा सकती है। फिलहाल यहां पर 50 टैंकरों से घर-घर तक पानी पहुंचाया जा रहा है, ताकि लोग को पानी की दिक्कत का सामना ना करना पड़े। 3 मरीज डायरिया के पहुंचे, 7 आईसीयू में
भागीरथपुरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ओपीडी में मंगलवार को 122 मरीज पहुंचे। इनमें से डायरिया के 3 मरीज थे। वहीं अस्पतालों में अब तक कुल 449 मरीज भर्ती हो चुके हैं, जिसमें से 433 स्वस्थ होकर वापस घर भी लौट चुके हैं। जबकि 9 अभी भी वार्ड में भर्ती है और 7 मरीजों का आईसीयू में इलाज चल रहा है।


