मध्यप्रदेश के नवगठित जिले मऊगंज में प्रशासनिक व्यवस्था की एक गंभीर चूक सामने आई है। वर्षों से रीवा जिले में अनुसूचित जाति (SC) के रूप में दर्ज कुम्हार/प्रजापति समाज का नाम मऊगंज जिला बनते ही सरकारी पोर्टल से गायब हो गया है। इसके चलते समाज के हजारों छात्र-छात्राएं जाति प्रमाण पत्र, छात्रवृत्ति और सरकारी नौकरियों से वंचित हो रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर मंगलवार शाम 4 बजे प्रजापति समाज ने कलेक्टर के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा और उग्र आंदोलन की चेतावनी दी। मऊगंज जिला बनने के बाद लोगों को विकास की नई उम्मीदें थीं, लेकिन कुम्हार (प्रजापति) समाज के लिए यह बदलाव परेशानी का सबब बन गया है। जिले के गठन के बाद से प्रशासनिक पोर्टल पर कुम्हार जाति का नाम प्रदर्शित नहीं हो रहा है। इस कारण न तो जाति प्रमाण पत्र बन पा रहे हैं और न ही छात्रवृत्ति व अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ मिल पा रहा है। लोक सेवा केंद्रों पर युवाओं को एक ही जवाब मिल रहा है कि पोर्टल में नाम नहीं होने के कारण प्रमाण पत्र नहीं बन सकता। अखिल भारतीय कुम्हार महासभा के जिलाध्यक्ष राममिलन प्रजापति ने बताया कि इस समस्या को लेकर कलेक्टर कार्यालय से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जिनमें विधायक नरेंद्र प्रजापति, प्रदीप पटेल और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम शामिल हैं, सभी को अवगत कराया गया है। यह मामला विधानसभा में भी उठाया गया और कलेक्टर स्तर से भी पत्राचार हुआ, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। समाज का कहना है कि रीवा जिले में वे SC पोर्टल पर दर्ज हैं, लेकिन मऊगंज में उन्हें किसी भी श्रेणी में नहीं दिखाया जा रहा है। इस स्थिति के कारण जाति प्रमाण पत्र के अभाव में बच्चों के स्कूलों में दाखिले अटक रहे हैं, छात्रवृत्ति न मिलने से उनकी पढ़ाई छूट रही है, और कई युवाओं की सरकारी नौकरी की पात्रता उम्र निकलने के कारण समाप्त हो रही है। इसी आक्रोश के बीच समाज ने कलेक्टर संजय कुमार जैन को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपते हुए न्याय की गुहार लगाई। वहीं, कलेक्टर संजय कुमार जैन ने बताया कि यह मामला राज्य शासन को भेजा जा चुका है और शीघ्र निराकरण की प्रक्रिया चल रही है।


