त्रिवेणी पुलिया से गुर्जर की थड़ी तक बन रहे एलिवेटेड रोड से भविष्य में ट्रैफिक को राहत मिलेगी, लेकिन फिलहाल यह प्रोजेक्ट आमजन के लिए परेशानी का कारण बन गया है। कागजों में जहां सड़क की चौड़ाई 160 फीट है, वहीं मौके पर यह केवल 140 फीट ही रह गई है। एलिवेटेड रोड के लिए जेडीए ने करीब 2100 मीटर क्षेत्र में 40 से 50 फीट चौड़ा कॉरिडोर बैरिकेड्स लगाकर घेर लिया है, जिससे सड़क की दो लेन पूरी तरह बंद हो चुकी हैं। ऊपर से सड़क के दोनों ओर व्यावसायिक गतिविधियां होने के कारण बेतरतीब पार्किंग और अस्थायी अतिक्रमण ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। गुर्जर की थड़ी, महेश नगर, रिद्धि-सिद्धि चौराहा और त्रिवेणी नगर से रोजाना करीब 1 से डेढ़ लाख वाहन गुजरते हैं। निर्माण कार्य और अतिक्रमण के चलते ट्रैफिक के लिए केवल 2 से 3 लेन ही बची हैं। ऐसे में पीक ऑवर्स में हालात बेहद खराब हो जाते हैं। 5 मिनट का सफर तय करने में 20 मिनट तक लग रहे हैं। 2.1 किलोमीटर लंबे इस हिस्से में चार ट्रैफिक सिग्नल हैं, जहां चौड़ाई कम होने से हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। सुबह करीब 3 घंटे और शाम को 4 घंटे तक वाहन चालकों को जाम में फंसना पड़ता है। ऑफिस जाने वाले कर्मचारी, एंबुलेंस और जरूरी सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। ऐसे समझें परेशानी एलिवेटेड रोड का काम शुरू होते ही सड़क का बड़ा हिस्सा घेर लिया गया। इसके साथ दुकानों के सामने वाहन खड़े होने लगे और कई जगह अस्थायी अतिक्रमण हो गया। इससे दोनों तरफ करीब 10-10 फीट की जगह और कम हो गई। नतीजा यह हुआ कि पूरा कॉरिडोर रोजाना ट्रैफिक जाम की चपेट में आ गया है। यह प्रोजेक्ट 30 महीने में पूरा होना है, लेकिन यदि ट्रैफिक प्रबंधन नहीं सुधरा तो आने वाले दिनों में परेशानी और बढ़ सकती है। अस्थायी अतिक्रमण हटे तो मिल सकती है राहत
इस समस्या का सबसे जल्द समाधान सड़क किनारे से अतिक्रमण और अवैध पार्किंग हटाना है। यदि प्रशासन सख्ती करे तो मौजूदा चौड़ाई में भी यातायात काफी हद तक सुचारू हो सकता है। निर्माण कार्य के साथ ट्रैफिक प्रबंधन पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी है, ताकि विकास की कीमत जनता को जाम में खड़े होकर न चुकानी पड़े। अस्थायी अतिक्रमण हटे तो मिल सकती है राहत
इस समस्या का सबसे जल्द समाधान सड़क किनारे से अतिक्रमण और अवैध पार्किंग हटाना है। यदि प्रशासन सख्ती करे तो मौजूदा चौड़ाई में भी यातायात काफी हद तक सुचारू हो सकता है। निर्माण कार्य के साथ ट्रैफिक प्रबंधन पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी है, ताकि विकास की कीमत जनता को जाम में खड़े होकर न चुकानी पड़े।


