सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाने और लोगों को ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से परिवहन विभाग द्वारा सड़क सुरक्षा अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में आज बुधवार को बिरला सीमेंट फैक्ट्री परिसर में ट्रक चालकों के लिए विशेष आई चेकअप शिविर आयोजित किया गया। इस शिविर में विशेषज्ञों द्वारा ड्राइवरों की आंखों की जांच की गई, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे सुरक्षित रूप से गाड़ी चला सकें। जांच के बाद जिन ड्राइवरों को जरूरत थी, उन्हें मौके पर ही चश्मे भी वितरित किए गए। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह था कि ट्रक चालक साफ नजर के साथ ड्राइविंग करें और दुर्घटनाओं की संभावना को कम किया जा सके। सवाल-जवाब और पुरस्कार से बढ़ी रुचि आई चेकअप के साथ-साथ कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा से जुड़े सवाल-जवाब का आयोजन भी किया गया। ट्रक ड्राइवरों से हेलमेट, सीट बेल्ट, ओवरस्पीडिंग और मोबाइल फोन के उपयोग से संबंधित सवाल पूछे गए। सही जवाब देने वाले चालकों को छोटे-छोटे प्राइस देकर प्रोत्साहित किया गया। इससे ड्राइवरों में न सिर्फ उत्साह देखा गया, बल्कि वे नियमों को समझने और अपनाने के लिए भी प्रेरित हुए। आयोजन का उद्देश्य सख्ती के बजाय समझाइश के जरिए लोगों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना था। चौराहों पर उतरे स्कूली बच्चे अभियान के दौरान स्कूली बच्चों की भागीदारी भी खास आकर्षण का केंद्र रही। बच्चों ने शहर के प्रमुख चौराहों पर पहुंचकर दोपहिया गाड़ी चालकों से हेलमेट पहनने और चारपहिया गाड़ी चालकों से सीट बेल्ट लगाने की विनम्र अपील की। बच्चों ने किसी को डराया नहीं, बल्कि प्यार और समझाइश के साथ नियमों का महत्व बताया। इस दौरान बच्चों ने लोगों को टॉफियां भी बांटी, जिससे माहौल खुशनुमा बना और संदेश आसानी से लोगों तक पहुंचा। सिर्फ ट्रैफिक नहीं, पर्यावरण का भी संदेश संस्कार द स्कूल के बच्चों ने इस मौके पर केवल ट्रैफिक नियमों तक ही सीमित न रहते हुए पर्यावरण और बिजली बचाने का संदेश भी दिया। उन्होंने लोगों से पेड़-पौधों की रक्षा करने, अनावश्यक बिजली खर्च न करने और साफ-सफाई बनाए रखने की अपील की। बच्चों के इस कोशिश से यह साफ संदेश गया कि सड़क सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। लोगों ने बच्चों की इस पहल की सराहना की और उनके कहे हुए संदेशों को गंभीरता से सुना। अंदर से जागरूक होना जरूरी: आरटीओ आरटीओ नेमीचंद पारीक ने बताया कि सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हेलमेट और सीट बेल्ट जीवन बचाने के लिए बहुत जरूरी हैं, लेकिन कई लोग इनकी अहमियत नहीं समझते। केवल चालान काटने से समस्या का समाधान नहीं होगा। चालान नियमों की पालना के लिए होते हैं, लेकिन जब तक लोग अंदर से जागरूक नहीं होंगे, तब तक हादसों पर पूरी तरह लगाम नहीं लग सकती। वहीं संस्कार द स्कूल के डायरेक्टर तिलक काबरा ने बताया कि कलेक्ट्री चौराहा, सुभाष चौक और चामटी खेड़ा चौराहे सहित कई स्थानों पर बच्चों ने जाकर लोगों और दुकानदारों से बात की और उन्हें नियमों के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि बच्चों के माध्यम से दिया गया संदेश समाज पर गहरा असर डालता है।


