नर्मदापुरम में बाघिन का शव मिला:दो दिन से बीमार थी, मौत का कारण जानने विसरा प्रयोगशाला भेजा

इटारसी रेंज की बीट सोनतलाई क्षेत्र में दो दिन से बीमार बाघिन बुधवार को मृत मिली। वन विभाग ने इस मामले की पुष्टि डीएफओ नरेंद्र पांडवा द्वारा देर शाम जारी प्रेस नोट में की। बताया गया कि बाघिन उसी स्थान पर मंगलवार को भी देखी गई थी, जहां बुधवार को उसका शव मिला। डीएफओ के अनुसार, सोनतलाई क्षेत्र में बाघिन दो दिनों से एक ही स्थान पर देखी जा रही थी। बुधवार को जब उस क्षेत्र में हलचल नहीं हुई, तो वन विभाग की टीम ने मौके पर जाकर जांच की। परीक्षण में बाघिन की मृत्यु की पुष्टि हुई। इसके बाद मुख्य वन संरक्षक, वृत्त नर्मदापुरम, वनमंडल अधिकारी नर्मदापुरम, डॉग स्क्वॉड, सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व के चिकित्सकों की टीम, एनटीसीए के चिकित्सक, तहसीलदार इटारसी, ग्राम पंचायत रानीपुर के सरपंच और वन अमले की मौजूदगी में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के अनुसार विधिवत पोस्टमार्टम किया गया। मृत्यु के कारणों की वैज्ञानिक पुष्टि के लिए बाघिन का विसरा एकत्रित कर अधिकृत प्रयोगशाला भेजा गया। पुलिस और अधिकारियों के बयान
सीसीएफ अशोक कुमार ने बताया कि परीक्षण के आधार पर बाघिन की मौत संभावित रूप से पेट में संक्रमण के कारण हुई प्रतीत होती है। पोस्टमार्टम के दौरान बाघिन के सभी अंग सुरक्षित मिले और किसी भी प्रकार के अवैध शिकार का कोई संकेत नहीं मिला। सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व के डॉग स्क्वाड ने आसपास के क्षेत्र की खोजबीन कर यह सुनिश्चित किया कि बाघिन के साथ कोई शिकार संबंधी घटना नहीं हुई। बाघिन के शव को सभी अधिकारियों की मौजूदगी में जलाया गया। बाघिन की मौत का सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट और लैब जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा। 8 महीने पहले बंदूक दिखाकर भागे थे शिकारी
तवानगर में तवा डैम का एक हिस्सा (रानीपुर का जंगल) सामान्य वन मंडल में आता है, जबकि दूसरा छोर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के कोर और बफर क्षेत्र में है। 8 महीने पहले मई 2025 में इसी जंगल में बंदूकधारी शिकारियों ने सांभर का शिकार किया था। उस समय वनकर्मियों को बंदूक दिखाकर शिकारी भाग निकले थे। 5 महीने पहले पंजा काटकर ले गए थे, अब तक नहीं पकड़े गए
इससे पहले 22 अगस्त 2025 को तवा नदी में एक बाघ का शव मिला था, जिसका पंजा शिकारी काटकर ले गए थे। उस समय स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) को जांच सौंपी गई थी। पांच महीने बीत जाने के बाद भी अफसर न तो शिकारियों को ढूंढ पाए और न ही यह पता लगा सके कि शिकार कहां हुआ था। यह विभाग की बड़ी लापरवाही को उजागर करता है। जनवरी में 5वीं मौत, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
बुधवार को मिला शव जनवरी महीने में बाघ की मौत की पांचवीं घटना है। प्रदेश में साल 2025 में 54 बाघों की मौत हुई थी, जिसे लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। मंगलवार को हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकार और एनटीसीए (NTCA) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 11 फरवरी को होगी। वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने कोर्ट को बताया कि पिछले पांच वर्षों में प्रदेश में 222 बाघों की मौत हुई है।

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