विदिशा में 125 वर्षों से चली आ रही ऐतिहासिक श्रीरामलीला के तहत बुधवार को भव्य राम बारात का आयोजन किया गया। यह बारात शहर ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रही। राम बारात की शुरुआत माधवगंज स्थित कांच मंदिर से हुई। भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न घोड़ों पर सवार होकर नगर के प्रमुख मार्गों से निकले। उनके साथ देवता, ऋषि, मुनि और राजा बाराती बनकर रथों, विमानों और पालकियों में शामिल हुए। महाराज दशरथ अपने रथ पर सवार होकर चारों पुत्रों की बारात की शोभा बढ़ा रहे थे। बारात जैसे-जैसे आगे बढ़ती गई, वैसे-वैसे स्वागत का सिलसिला भी बढ़ता गया। शहर के विभिन्न मार्गों पर मंच सजाए गए, जहां सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर भगवान श्रीराम की आरती उतारी। बैंड-बाजों, ढोल-ताशों और डीजे पर राम भजनों की गूंज के बीच श्रद्धालु नाचते-गाते नजर आए। राम बारात को देखने के लिए महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग बड़ी संख्या में सड़कों के दोनों ओर खड़े थे। कई स्थानों पर बारातियों के लिए जलपान की भी व्यवस्था की गई थी। बारात देर रात रामलीला परिसर पहुंची, जहां महाराज जनक ने बारात की आगवानी की। राम बारात को लेकर जिला और पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी के निर्देशन में करीब 100 पुलिस जवान, नगर रक्षा समिति और ग्राम रक्षा समिति के सदस्य तैनात रहे। यातायात व्यवस्था को भी सुचारु बनाए रखा गया। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष विदिशा की ऐतिहासिक रामलीला को 125 वर्ष पूरे हो गए हैं। इसी कारण इस बार आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया।


