भास्कर न्यूज | चाईबासा शहर समेत ग्रामीण इलाकों में बसंत पंचमी को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। इस वर्ष 23 जनवरी को ज्ञान की देवी मां सरस्वती की विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी। बसंत पंचमी के करीब आने के साथ ही दिन-रात मेहनत कर मूर्तियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। जिनकी ऊंचाई 2 फीट से लेकर 14-15 फीट तक है और कीमतें 3 हजार से 15 हजार या उससे भी ज़्यादा हैं। चाईबासा कुम्हारटोली के मूर्तिकार संजय प्रजापति ने बताया कि बसंत पंचमी उनके लिए खास पर्व होता है। इन दिनों वह अपने परिवार वाले के साथ अलग-अलग आकार की प्रतिमाओं को विभिन्न रंगों से सजाकर अंतिम रूप दे रहे हैं। उनका कहना है कि मां सरस्वती की प्रतिमा बनाते समय शांति, सौम्यता और ज्ञान का भाव दिखाना जरूरी होता है। चाईबासा | वर्ग अष्टम बोर्ड परीक्षा-2026 के लिए परीक्षा आवेदन प्रपत्र जमा करने की निर्धारित अंतिम तिथि को विस्तारित किए जाने की मांग को लेकर प०सिंहभूम जिला के कांग्रेस प्रवक्ता त्रिशानु राय ने छात्रहित में बुधवार को जैक, झारखण्ड के अध्यक्ष को पत्र लिखा है। त्रिशानु राय ने लिखे पत्र में कहा है कि जैक, झारखण्ड के द्वारा प्रकाशित विज्ञप्ति के अनुसार वर्ग अष्टम बोर्ड परीक्षा-2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रपत्र जमा करने के लिए दिनांक-23.12.2025 से 16.01.2026 तक की अवधि निर्धारित निर्देशित किया गया था। विभिन्न विद्यालयों ने अपने स्तर से इस कार्य को पूर्ण करने हेतु सभी प्रयास किये परन्तु निर्धारित अवधि के दौरान विभागीय अवकाशों तथा ठंड के कारण कक्षाएं बन्द रहने के कारण दिनांक-16 जनवरी26 तक प० सिंहभूम जिला के काफी छात्रों का फॉर्म जमा नहीं किया जा सका है। आवेदन प्रपत्र जमा करने की अंतिम तिथि को विस्तारित की जाए। भास्कर न्यूज | सरायकेला प्रशासनिक पारदर्शिता, तकनीक आधारित शासन और राजस्व संवर्धन की दिशा में सरायकेला –खरसावां जिला प्रशासन ने एक नई मिसाल कायम की है। झारखंड राज्य में पहली बार जब्त बालू की ऑनलाइन नीलामी संपन्न कराते हुए जिले ने न केवल तकनीकी दक्षता का परिचय दिया, बल्कि राज्य को अपेक्षा से कहीं अधिक राजस्व भी दिलाया। जिला प्रशासन द्वारा विधिसम्मत एवं पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया के तहत लगभग 12 लाख घन फीट सीज बालू की ऑनलाइन नीलामी की गई। नीलामी के लिए आधार मूल्य 1.72 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया था, किंतु प्रतिस्पर्धात्मक ऑनलाइन बोली प्रक्रिया के कारण अंतिम नीलामी मूल्य बढ़कर 2.30 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इससे राज्य को करीब 58 लाख रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ, जिसे एक बड़ी वित्तीय उपलब्धि माना जा रहा है। इस संबंध में उपायुक्त नीतिश कुमार सिंह ने कहा कि जब्त खनिज संसाधनों के निपटान में ऑनलाइन नीलामी प्रणाली अपनाना सुशासन की दिशा में एक ठोस और प्रभावी कदम है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होती है, बल्कि अवैध खनन पर भी प्रभावी अंकुश लगता है और राज्य को वैध राजस्व प्राप्त होता है। उपायुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में जिले में अवैध खनन के विरुद्ध की जाने वाली कार्रवाइयों में जब्त खनिजों के निपटान के लिए इसी प्रकार की पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धात्मक ऑनलाइन प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी। नोवामुंडी | थाना क्षेत्र के राजस्व ग्राम पिचुआ में स्थित टीडीपीएल क्रशर खदानों से लीज पट्टा की अवधि समाप्त होने के बावजूद अवैध रूप से गिट्टी व चिप्स की क्रशिंग, पत्थर उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण किए जाने का आरोप लगाया गया है। इस मुद्दे को लेकर झारखंड राज्य आंदोलनकारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने जिला प्रशासन और जिला खनन पदाधिकारी से शिकायत की है। संयुक्त मोर्चा ने मांग की है कि पूरे मामले की औचक जांच कर अवैध खनन व भंडारण में संलिप्त व्यक्तियों तथा संबंधित भू-स्वामी के विरुद्ध संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए। मोर्चा का कहना है कि टीडीपीएल क्रशर की लीज की समय सीमा 17 जनवरी 2026 तक थी, लेकिन इसके बावजूद क्रशर मालिक द्वारा नियम-कानूनों को दरकिनार कर सैकड़ों हाइवा लगाकर उत्खनन, उत्पादन, परिवहन और नोवामुंडी प्रखंड क्षेत्र के कोटगढ़ मेन चौक स्थित विशाल मैदान में पत्थरों का भंडारण किया जा रहा है। मोर्चा के अनुसार, पिचुआ और उलीहातु गांव के ग्रामीणों ने ग्रामीण मुंडा राहुल पुरती तथा ग्राम सभा के सोनाराम पुरती और सोनाराम हेम्ब्रम के नेतृत्व में टीडीपीएल क्रशर इकाइयों द्वारा कथित अवैध गतिविधियों के विरोध में लगातार दो दिनों तक डांगोवापोसी-कोटगढ़ मुख्य मार्ग को जाम किया था। ग्रामीणों की मांग थी कि लीज अवधि समाप्त होने के बाद हो रहे क्रशिंग, खनन, परिवहन और भंडारण पर तत्काल रोक लगाई जाए। संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने आरोप लगाया कि डीटीपीएल प्रबंधन ग्रामीण मुंडाओं और ग्राम सभा पर दबाव बनाकर उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रहा है। मामले में संबंधित अंचल अधिकारी, एसडीओ, थाना पुलिस और जिला खनन पदाधिकारी की कथित मिलीभगत के कारण अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।


