यदि बंधन से निकलना हो तो स्वयं को छोटा समझें

धमतरी | रुद्री रोड हनुमान मंदिर में जारी हनुमान कथा में संकर्षण शरण ने हनुमान जी की महिमा का वर्णन करते हुए 20 जनवरी को सुंदरकांड की कथा सुनाई। लंका दहन की प्रसंग में में बताया कि जितने बड़े बनोगे, उतना ही बंधन है, इसलिए छोटा बन जाओ बंधन से मुक्त हो जाओगे। अहंकार समाप्त, ईर्ष्या समाप्त एकदम सरल बन जाना चाहिए। सरल लोग बंधन से मुक्त हो जाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि रावण के सभा में हनुमानजी भी बहुत छोटे बन गए और बाहर निकाल कर पूछ को बढ़ा दिया। पूंछ बढ़ती गई और जितना अधिक पूछ बढ़ा, उतने अधिक कपड़ा तेल लगने लगा। दरबार में कुछ बचा नहीं। रावण का गोदाम खाली हो गया। रावण ने आदेश दिया पूरे लंका से कपड़ा लाया जाए। सबके घर से कपड़ा लाया जाए और लंका छोटा सा साम्राज्य नहीं है। लंका एक बड़ा सा विशाल देश है और पूरे राष्ट्र से हनुमानजी की पूंछ में कपड़ा बांधने के लिए कपड़ा आने लग गया।

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