रांची विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)- 2020 के कार्यान्वयन और परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर हाई लेवल समिति बनाई गई है, जिसकी 9 फरवरी को होने वाली अहम बैठक से पहले ही विवाद खड़ा हो गया है। विधि संकाय के डीन डॉ. पंकज चतुर्वेदी ने गठित अहम कार्यान्वयन एवं निगरानी समिति और परीक्षा सुधार समिति में विधि संकाय को शामिल नहीं किए जाने पर आपत्ति जताई है। डॉ. चतुर्वेदी ने विभागाध्यक्षों और निदेशकों के व्हाट्सएप ग्रुप में अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे अकादमिक परंपरा और परीक्षा व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के विपरीत बताया है। विधि डीन ने सवाल किया है कि एग्जाम बोर्ड में सभी संकाय के डीन सदस्य होते हैं। ऐसी स्थिति में इस कमेटी से विधि संकाय क्यों बाहर? इसका जवाब विवि के पास नहीं है। ऐसे में परीक्षा सुधार से जुड़ी समिति में विधि संकाय को अलग रखना समझ से परे है। परीक्षा सुधार और एनईपी कार्यान्वयन जैसे विषय सीधे तौर पर विधि संकाय से भी जुड़े हैं और बिना विधि संकाय के प्रतिनिधित्व के कोई भी निर्णय अधूरा और असंतुलित माना जाएगा। डीन की आपत्ति के बाद समिति गठन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। यह मामला अब केवल प्रतिनिधित्व का नहीं, बल्कि संस्थागत संतुलन और अकादमिक समानता से जुड़ा माना जा रहा है। बैठक में एनईपी के क्रियान्वयन, पाठ्यक्रम सुधार, मूल्यांकन प्रणाली और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर अहम फैसले लिए जाने की संभावना है। ऐसे में विधि संकाय की आपत्ति ने बैठक से पहले ही विश्वविद्यालय प्रशासन की हलचल बढ़ा दी है। कई शिक्षकों का कहना है कि अगर समिति में संशोधन नहीं किया गया, तो भविष्य में लिए गए निर्णयों पर सवाल उठ सकते हैं। रांची यूनिवर्सिटी में नई शिक्षा नीति के सिलेबस से वर्ष 2022 से ही स्नातक स्तर पर पढ़ाई हो रही है। चार वर्षीय यूजी के फर्स्ट बैच का इसी साल फाइनल रिजल्ट आएगा। इसका अंक पत्र का फॉरमैट यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा तैयार कर लिया गया है। बैठक में इसे भी स्वीकृति प्रदान किए जाने की संभावना है। इसकी भी तैयारी पूरी कर ली गई है।


