दंतेवाड़ा जिले में 23 अगस्त को आई भीषण बाढ़ से मची तबाही का खामियाजा आज भी 100 से ज्यादा गांवों के करीब एक लाख लोग भुगत रहे हैं। इस बाढ़ में 23 पुल-पुलिए बहे, जिन्हें आज तक बनाया नहीं जा सका है। इन इलाकों का दंतेवाड़ा और बस्तर का सीधा संपर्क भी टूट गया है। लोग रास्ता बदलकर आने-जाने को मजबूर हैं। जिले के बारसूर इलाके में 3 पुल, गीदम–बारसूर रोड पर एक, बारसूर-नारायणपुर पल्ली रोड पर एक, जबकि चित्रकोट-जगदलपुर रोड पर बना पुल भी क्षतिग्रस्त है। दंतेवाड़ा में चितालंका बाईपास का पुल भी टूटा पड़ा है। इसके विकल्प में बाईपास सड़क बनाई गई है, लेकिन आगे इस रास्ते पर डंकिनी नदी पुल का निर्माण भी अधूरा है। इधर, दंतेवाड़ा-बस्तर को जोड़ने वाली गोरली नदी का पुल भी टूट चुका है। इसी एक रूट पर दंतेवाड़ा, सुकमा और बस्तर के 50 से ज्यादा गांवों का आवागमन निर्भर है। कुछएक जगहों पर डायवर्सन जैसे वैकल्पिक रास्ते जरूर बनाए गए, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकला है। पुल निर्माण में बजट की मंजूरी को रोड़ा बताया जा रहा है। अंदेशा है कि इस बारिश 100 गांवों का संपर्क पूरी तरह कट जाएगा। अबूझमाड़ में बजट 25 करोड़ का, पर एक रुपया भी नहीं मिला
अबूझमाड़ इलाके में बाढ़ में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की 25 सड़कें भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। इन्हें सुधारने 25 करोड़ का बजट बनाया गया, लेकिन एक रुपए की भी मंजूरी नहीं मिली। मरम्मत करने 1 करोड़ की तत्काल आवश्यकता बताई गई, वह भी मंजूर नहीं हुआ। पीएमजीएसवाई के ईई वैभव देवांगन ने कहा, लगातार देरी से लोगों में नाराजगी बढ़ी है। बजट मिलते ही काम शुरू कर देंगे।


