छत्तीसगढ़ में एमएसपी पर धान खरीदी जारी है, लेकिन जमीनी हालात सिस्टम की रफ्तार पर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं। खरीदी केंद्रों पर धान का उठाव नहीं होने से भंडारण की समस्या गंभीर होती जा रही है। धान का उठाव नहीं होने से प्रदेश के 2740 खरीदी केंद्रों में से 1358 केंद्रों पर धान की मात्रा तय बफर लिमिट से अधिक हो चुकी है। केंद्रों में जगह की कमी के कारण कई स्थानों पर किसानों को इंतजार करना पड़ रहा है, वहीं खरीदी प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। वहीं प्रदेश में 27 लाख पंजीकृत किसानों में से अब तक 21 लाख किसान ही अपना धान बेच पाए हैं। यानी छह दिन में साढ़े पांच किसानों से धान खरीदना मार्कफेड के लिए बड़ी चुनौती है। दरअसल, प्रदेश में धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू हुई है जो कि 31 जनवरी 2026 तक चलेगी। अभी तक प्रदेश के 21 लाख 31 हजार किसानों से 115 लाख टन धान खरीदा जा चुका है। इनमें से 66 लाख टन से ज्यादा धान खरीदी केंद्रों में रखा हुआ है। इसके एवज में किसानों को 27 हजार करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। वहीं दूसरी ओर पंजीयन की धीमी गति के कारण अब तक साढ़े पांच लाख से ज्यादा किसान केंद्रों तक पहुंच ही नहीं पाए हैं। जबकि लगभग तीन लाख किसानों का ऑनलाइन टोकन ही नहीं कटा है। पीएफएमएस से किसानों को कर रहे भुगतान धान खरीदी के बाद भुगतान की प्रक्रिया पीएफएमएस यानी पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए की जा रही है। अब तक लगभग 25.34 लाख प्रकरणों की फाइलें तैयार की गईं, जिनमें से 24.86 लाख किसानों के भुगतान की पुष्टि हो चुकी है। केवल 47 हजार के आसपास प्रकरण ऐसे हैं, जिनमें तकनीकी या दस्तावेजी कारणों से भुगतान की पुष्टि लंबित है। राज्य में सबसे अधिक धान खरीदी और भुगतान का दायित्व जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और राजनांदगांव संभाल रहे हैं। इन जिलों में धान खरीदी की मात्रा और भुगतान दोनों ही सबसे ज्यादा दर्ज किए गए हैं। इन जिलों में बफर स्टॉक लिमिट से ज्यादा बस्तर में 79 खरीदी केंद्र हैं सभी में लिमिट बफर स्टाक से ज्यादा है। इसी तरह दंतेवाड़ा के सभी 15 केंद्र, बीजापुर के 30 में से 26 केंद्र, कांकेर के 149 में से 134, कोंडागांव के 67 में से 65, नारायणपुर के 17 में 16, सुकमा के 25 में से 23, बालोद के 143 में से 117, राजनांदगांव के 96 में से 86, मोहला-मानपुर के सभी 27 केंद्रो में धान बफर स्टाक से ज्यादा है। अब 24 से 26 जनवरी तक रहेगा अवकाश 31 जनवरी तक धान खरीदी की जाएगी लेकिन इस बीच तीन दिन 24, 25 और 26 जनवरी को अवकाश रहेगा। यानी अब सिर्फ छह दिन ही धान खरीदी होगा। इस साल कुल 160 लाख टन खरीदी का टारगेट रखा गया था लेकिन अभी तक सिर्फ 116 लाख टन की खरीदी ही हो पाई वहीं जिस तरह से खरीदी केंद्रों में धान जाम पड़े हैं इसे देखते हुए खरीदी में तेजी आने के संकेत काफी कम हैं। इस लिहाज से राज्य सरकार के पिछले आंकड़े के आसपास ही पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।


