भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने प्रदेश कार्यालय में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस सरकार के दौरान हुए पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन में परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली हुई, जिससे युवाओं के साथ धोखा हुआ और योग्य अभ्यर्थियों को बाहर कर अयोग्य को जगह दी गई। भाजपा सरकार बनने के बाद 326 परीक्षाएं पारदर्शी तरीके से आयोजित की गईं, जिनमें से एक भी पेपर लीक नहीं हुआ। कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत ने भी कांग्रेस के भ्रष्टाचार, परिवारवाद और पेपर लीक पर तीखा हमला बोला। पांच साल तक जांच को दबाया गया और अब उन्हें ऐसे मामलों पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। अविनाश गहलोत ने कहा कि डोटासरा को जवाब देना चाहिए कि उनकी सरकार में यह सब क्यों नहीं हुआ? भाजपा की सरकार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई हुई है। अरुण चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के समय राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की जांच समिति में खुद चोरों को थानेदार बना दिया गया। कांग्रेस शासन में 19 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, 133 प्रकरण दर्ज हुए, लेकिन किसी पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। इससे साफ है कि यह सब बड़े लोगों के संरक्षण में हुआ था। वहीं हमारी सरकार ने कांग्रेस शासन में हुए पेपर लीक से जुड़े 428 लोगों को गिरफ्तार किया गया और एसआई परीक्षा अनियमितताओं में 138 लोग गिरफ्तार हुए। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा सरकार की कैबिनेट में डिस्टर्ब एरियाज बिल 2026 के प्रारूप को मंजूरी देने को राजनीतिक एजेंडा बताया है। डोटासरा ने मीडिया बयान में कहा कि यह बिल भाजपा के राजनीतिक एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए है। बिल की भाषा ही संवैधानिक नहीं है। सरकार ने केन्द्र से आई हुई गुजरात की पर्ची प्राप्त कर बिल बनाया है। गुजरात मॉडल के रूप में लाए गए इस बिल उद्देश्य दंगा रोकना नहीं बल्कि राजस्थान जैसे शांत प्रदेश को अशांत करने की एक साजिश है। डर का माहौल बनाकर सत्ता में बने रहने की कवायद है। संविधान के अनुच्छेद 300ए में हर व्यक्ति को अपनी संपत्ति पर अधिकार है, उसे वंचित करने का यह षडयंत्र है। संविधान में अनुच्छेद 14 में सभी नागरिकों को समानता का अधिकार प्राप्त है, यह बिल उसका भी उल्लंघन करता है। जनसंख्या असंतुलन कोई कानूनी शब्द नहीं है। डिस्टर्ब एरिया किस आधार पर घोषित होगा इसका कोई उल्लेख नहीं है। विधानसभा सत्र में सदन से सड़क तक विरोध करेंगे। डोटासरा ने कहा कि बिल के माध्यम से अशांति पैदा कर प्रदेश को जनता के मुद्दों से दूर ले जाना है। प्रदेश में डर का माहौल बने। सरकारी गुंडागर्दी को वैधानिक जामा पहनाने की एक कोशिश है। पहले सरकार किसी क्षेत्र को अशांत क्षेत्र घोषित करेगी, फिर शहर को और उसके बाद पूरे प्रदेश को अशांत बनाएंगे। अधिकारी राज लाकर भाजपा की प्रदेश सरकार लोकतंत्र पर प्रहार कर रही है।


