भास्कर न्यूज| महासमुंद महासमुंद जिले के युवा अब खेती को लाभ का धंधा बनाने की नई इबारत लिख रहे हैं। सरायपाली क्षेत्र के ग्राम इच्छापुर के एक शिक्षित युवा किसान श्रीराम नायक ने अपनी मेहनत और आधुनिक तकनीक से परंपरागत धान की खेती के बजाय फूलों की बागवानी को चुना है। आज उनके खेतों में खिले गुलाब और गेंदे की खुशबू केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि प्रयागराज, काशी और बनारस जैसे बड़े शहरों तक पहुंच रही है। परंपरागत खेती से हटकर जिले के युवा किसान अब आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर बागवानी (फूलों की खेती) की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। धान, दलहन और तिलहन जैसी फसलों की तुलना में कम लागत और अधिक मुनाफा मिलने के कारण गेंदा, गुलाब और अन्य सुगंधित व औषधीय पौधों की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा बनती जा रही है। ऐसे ही खेती से ग्राम इच्छापुर के किसान श्रीराम अच्छी आमदनी लेकर दूसरों के लिए प्रेरणा बने हुए है। नायक ने बताया कि वह 2017 से गुलाब की खेती कर रहे हैं। बारहमासी फसल होने के चलते वे एक एकड़ में गेंदे और करीब एक एकड़ पॉली हाउस में गुलाब की खेती कर रहे हैं। इसके अलावा वे सीजन और मांग के अनुरूप फूलों की खेती करते हैं। नायक ने राजनीति विज्ञान में एमए किया है। इसके अलावा फार्मेसी में डिप्लोमा भी ली है। बावजूद उन्होंने नौकरी को छोड़ कृषि को चुना है। वे बताते हैं कि किसान परिवार से होने के कारण खेती किसानी से लगाव है। घर में परंपरागत खेती सिर्फ धान की फसल ही लेते थे। वे पढ़ाई करने के लिए रायपुर गए तो वहां फूल बाजार देखने के लिए जाते थे। वहां गुलाब 20 रुपये में खरीदते थे। पूछने पर फूलों को बाहर प्रदेश पुणे, नागपुर से लाना बताए। फूल बाजार में इस तरह की कीमतें और फूलों की मांग देखकर नायक ने अपने क्षेत्र में ही गुलाब के फूलों की खेती करने की सोची। उन्होंने बताया कि हर महीने करीब 60 हजार रुपए और सीजन रहने पर 1 लाख रुपए तक आय फूलों की खेती से मिल जाती है। पुणे के गुलाब गार्डनों के भ्रमण से बढ़ी हिम्मत श्रीराम नायक ने बताया कि साल 2016 में उद्यानिकी विभाग ने पुणे के गुलाब गार्डनों का भ्रमण कराया। इन अनुभवों के आधार पर ही उन्होंने गुलाब की खेती शुरू की और अब इससे वे अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। नायक ने यह भी बताया कि गुलाब की खेती करने वाले किसानों को उद्यानिकी विभाग और राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से सहयोग मिलता है। ग्रामीणों को मिला रोजगार: बागवानी करने के लिए गांव के करीब एक दर्जन से अधिक लोगांे को भी इससे रोजगार मिला है। बारह महीने ये लोग यहीं खेती में मदद करते है। बदले में उन्हें 200 रुपए प्रतिदिन रोजी भी मिलती है। इससे गांव के लोगांे को भी रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता। नायक के साथ रहकर फूलों की आधुनिक खेती भी सीख रहे हैं।


