चंडीगढ़ के रिटायर्ड SP को कोर्ट से राहत:मोबाइल नंबर ट्रैक करने का आरोप था; CBI ने दाखिल की कैंसिलेशन रिपोर्ट

छेड़छाड़ के एक मामले से जुड़ी पीड़िता महिला की मोबाइल टावर लोकेशन निकलवाने और साझा करने के आरोपों में चंडीगढ़ के रिटायर्ड एसपी रोशन लाल और कम्युनिकेशन विंग में तैनात रहे इंस्पेक्टर पवनेश कुमार को राहत मिली है। करीब दो साल तक चली जांच के बाद CBI को दोनों अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला। इसके चलते CBI ने ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल कर दी है। कोर्ट ने CBI की कैंसिलेशन रिपोर्ट पर शिकायतकर्ता को पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया है। इस मामले में अब अगली सुनवाई 30 मार्च को होगी। मोबाइल टावर लोकेशन ट्रैक करने का आरोप शहर की रहने वाली एक महिला ने 23 नवंबर 2020 को अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत दी थी। महिला का आरोप था कि उसका और उसके पति का मोबाइल नंबर अवैध रूप से ट्रैक किया गया और मोबाइल टॉवर लोकेशन भी साझा की गई, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान हो गई थी। शिकायत के बाद तत्कालीन एसएसपी ने मामले की जांच डीएसपी क्राइम को सौंपी थी। शुरुआती जांच में सामने आया था कि कम्युनिकेशन विंग में तैनात इंस्पेक्टर पवनेश कुमार ने तत्कालीन एसपी रोशन लाल के कहने पर महिला और उसके पति की मोबाइल टावर लोकेशन साझा की। विभागीय जांच के बाद मामला पहुंचा CBI जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद विभाग ने गंभीरता दिखाते हुए इंस्पेक्टर पवनेश कुमार और रोशन लाल के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की थी। बाद में यह मामला CBI को सौंप दिया गया। CBI ने दोनों पुलिस अधिकारियों के खिलाफ IPC की धारा 420, 120-B और इंडियन टेलीग्राफ एक्ट, 1885 के तहत FIR दर्ज की थी। हालांकि, विस्तृत जांच के दौरान CBI को ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि दोनों अधिकारियों ने जानबूझकर कानून का उल्लंघन किया हो। इसी आधार पर अब CBI ने अदालत में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल कर दी है। सबूतों से छेड़छाड़ का अलग मामला इस पूरे प्रकरण से जुड़े एक अन्य मामले में सीबीआई ने चंडीगढ़ पुलिस के 2 इंस्पेक्टरों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की थी। मोबाइल टावर लोकेशन को लेकर शिकायत देने वाली इसी महिला ने 4 अप्रैल 2022 को इंडस्ट्रियल एरिया थाना में शहर के एक बड़े मॉल के तत्कालीन एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के घर से आईफोन-12 जब्त किया था, लेकिन आरोप है कि मोबाइल को सील करने की बजाय पुलिस ने कथित तौर पर आईफोन-12 को बदलकर आईफोन-7 को केस प्रॉपर्टी के तौर पर जब्त कर सील कर दिया। बताया गया कि सील किया गया आईफोन-7 भी आरोपी का ही था। मोबाइल की इस कथित अदला-बदली को लेकर पुलिस पर गंभीर आरोप लगे कि आरोपी को बचाने के लिए साजिश के तहत असली मोबाइल और सिम उसे लौटा दिए गए और बिना सिम वाला आईफोन-7 केस फाइल में रख दिया गया। इस मामले में CBI ने शिकायत मिलने पर आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज किया था।

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