जमशेदपुर के बिष्टुपुर एसएसपी आवास के समीप से चर्चित उद्यमी कैरव गांधी के अपहरण मामले में पुलिस को अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिली है। जांच के दौरान यह सामने आया है कि अपहरण में प्रयुक्त स्कॉर्पियो वाहन का मालिक राजशेखर है, जो बिहार के नालंदा जिले के राजगीर थाना क्षेत्र अंतर्गत नई पोखर का निवासी है। महिला मित्र से भी पुलिस ने की पूछताछ
पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए नालंदा तक पहुंची, लेकिन आरोपी पुलिस के पहुंचने से पहले ही फरार हो गया। घटना के नौ दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न तो कैरव गांधी का कोई सुराग मिला है और न ही अपहरणकर्ताओं तक पुलिस पहुंच सकी है। इस बीच सोनारी थाना क्षेत्र में कैरव की एक महिला मित्र से भी पुलिस ने पूछताछ की, हालांकि वहां से भी कोई अहम जानकारी हाथ नहीं लगी। 13 जनवरी को सर्किट हाउस इलाके से शुरू हुई इस सनसनीखेज अपहरण की घटना ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोल्हान के डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा लगातार जल्द खुलासे का दावा कर रहे हैं, लेकिन 192 घंटे बीत जाने के बावजूद पुलिस खाली हाथ है। बुधवार की शाम कैरव गांधी के घर के बाहर लोगों की भारी भीड़ जुटी रही। तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। कोई अपराधियों से मोलभाव की बात करता दिखा तो कोई पुलिस के अपराधियों के करीब पहुंचने का दावा करता रहा। हालांकि किसी भी पुलिस अधिकारी ने इन बातों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की। अपराध का प्रोफेशनल ब्लूप्रिंट
अपराधियों ने इस किडनैपिंग को पूरी तरह फिल्मी अंदाज में अंजाम दिया। जिस स्कॉर्पियो से कैरव गांधी का अपहरण किया गया, उस पर ‘पुलिस’ लिखा हुआ था। इससे साफ है कि अपराधियों ने खाकी का सहारा लेकर शहर में नाकाबंदी पार करने की रणनीति बनाई थी। पुलिस का मानना है कि अपराधियों ने कैरव को डराकर या पुलिस की सतर्कता का फायदा उठाकर उसे शांतिपूर्वक अपनी गाड़ी में शिफ्ट कर लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची पुलिस मुख्यालय भी एक्शन मोड में है और डीआईजी स्तर पर मॉनिटरिंग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। कौन है राजशेखर
राजशेखर के पिता का नाम उपेंद्र सिंह है। वह राजगीर में ‘मारवाड़ी बासा’ नामक होटल का संचालन करता है। इससे पहले राजशेखर नवादा जिले के हिसुआ प्रखंड में कंप्यूटर कोचिंग चलाता था, जिसे विवादों के चलते बंद कर दिया गया। राजशेखर का घर नई पोखर इलाके में है, जिसे देशभर में साइबर अपराधियों का सुरक्षित ठिकाना माना जाता है। पुलिस ने नालंदा पुलिस के सहयोग से कई बार उसके घर पर दबिश दी, लेकिन वह अपनी कार समेत फरार होने में सफल रहा। हाई अलर्ट के बावजूद आरोपी का बच निकलना पुलिस के लिए बड़ा सवाल बन गया है।


