मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के काफिले की पायलट कार 11 दिसंबर को जयपुर में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। रॉन्ग साइड से तेज स्पीड में आ रही एक टैक्सी कार काफिले में घुस गई। इस दुर्घटना में एक एएसआई और टैक्सी ड्राइवर की मौत हो गई। वहीं 4 अन्य घायल हो गए। यह हादसा अभी तक चर्चा में बना हुआ है कि आखिर वीआईपी मूवमेंट के दौरान कड़ी सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था के बावजूद इतनी बड़ी दुर्घटना क्यों हुई? पुलिस मुख्यालय उच्च स्तरीय जांच करवाएगा कि क्यों यह दुर्घटना हुई? इस सवाल का जवाब जानने भास्कर टीम सड़क सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञ के साथ घटनास्थल पर पहुंची। सड़क हादसों में लोगों की जान बचाने वाली पद्मश्री डॉ. माया टंडन और पूर्व पुलिस अधिकारियों से भी बात की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… जहां हादसा हुआ वहां रोड इंजीनियरिंग में ढेरों खामियां
सीएम भजनलाल शर्मा बुधवार दोपहर को जगतपुरा से एक अन्य कार्यक्रम में शिरकत करने जा रहे थे। इस दौरान महल रोड पर ट्रैफिक पुलिस ने रास्ता रोक रखा था। जब सीएम का काफिला वहां से गुजरा, उसी दौरान टोंक रोड से तेज रफ्तार टैक्सी रॉन्ग साइड से आ गई। महिला ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने उसे रोकने का इशारा किया लेकिन टैक्सी नहीं रुकी और एएसआई सुरेंद्र सिंह को टक्कर मार दी। इसी दौरान काफिले की पायलट गाड़ी सामने आ गई और टैक्सी उससे भिड़ गई। टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। दुर्घटना में सुरेंद्र सिंह के बाद ट्रैक्सी ड्राईवर पवन ने भी दम तोड़ दिया। इस हादसे में 4 अन्य लोग घायल हो गए थे। भास्कर टीम, एशियन रोड सेफ्टी एकेडमी की मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. प्रेरणा अरोड़ा सिंह के साथ सबसे पहले अक्षय पात्र चौराहे पर पहुंची। जहां सीएम भजनलाल शर्मा के काफिले की कार का एक्सीडेंट हुआ। डॉ. अरोड़ा ने बताया कि इस दुर्घटना के पीछे टैक्सी चालक की लापरवाही के साथ ही रोड इंजीनियरिंग की कमी एक बहुत बड़ा कारण मानती हैं। डॉ. अरोड़ा के अनुसार, महल रोड के अक्षय पात्र चौराहे से लिंक होने वाली किसी भी सड़क पर स्पीड ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप्स नहीं है। इससे वाहनों की गति नियंत्रित नहीं हो पाती और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। अगर स्पीड ब्रेकर होता तो टैक्सी ड्राईवर इतनी तेज स्पीड से चौराहे को क्रॉस करने की कोशिश नहीं कर सकता था। उन्होंने कहा कि लिंक सड़कों को इस तरह से डिजाइन किया जाना चाहिए, जिससे मैन सड़क के चौराहे पर पहुंचने से पहले ही वाहन की स्पीड को कंट्रोल किया जा सके। सड़क पर गति को नियंत्रित करने के लिए स्पीड ब्रेकर या रंबल स्ट्रिप्स होना बेहद जरूरी है। अक्षय पात्र चौराहा जैसे प्रमुख चौराहों पर यह बहुत जरूरी है, जहां बड़ी दुर्घटनाएं होने का खतरा है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश के अधिकांश चौराहे और तिराहे पहले से ही ब्लैक स्पॉट माने जाते हैं, लेकिन इन स्थानों पर सुधार की कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई है। अक्षय पात्र चौराहे पर दिखी ये कमियां VIP काफिले के लिए निर्धारित गति सीमा नहीं होना दूसरा बड़ा कारण इस हादसे के पीछे एक और महत्वपूर्ण पहलू है वीआईपी काफिले की स्पीड। एक्सपर्ट का मानना है कि वीआईपी मूवमेंट के दौरान वाहनों की गति को उस सड़क के लिए निर्धारित गति सीमा से अधिक नहीं होने देना चाहिए। आपने देखा होगा जब भी मुख्यमंत्री, मंत्री या किसी भी VIP का मूवमेंट होता है, तब उनके काफिले में शामिल गाड़ियों की रफ्तार बहुत ज्यादा होती है। डॉ. प्रेरणा अरोड़ा का कहना है, ‘यहां तक कि जब ट्रैफिक पुलिस और सुरक्षा अधिकारी काफिले के साथ होते हैं, तब भी काफिले के वाहनों की गति को कंट्रोल किया जाना चाहिए। स्पीड लिमिट से अधिक गति से चलने पर अचानक सामने कोई वाहन या जानवर भी आ सकता है, उस स्थिति में काफिले के वाहन को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।’ शहर के अंदर वीआईपी मूवमेंट के दौरान गति को बहुत सख्ती से नियंत्रित किया जाना चाहिए। यह केवल सुरक्षा की दृष्टि से ही जरूरी नहीं है, बल्कि इससे दुर्घटनाओं को टाला भी जा सकता है। जहां CM के काफिले की कारें भिड़ी, वहां हर साल 150 से 200 हादसे महल रोड, जो जयपुर की सबसे अच्छी सड़कों में से एक मानी जाती है। 11 दिसंबर को इसी रोड पर सीएम का काफिला हादसे का शिकार हुआ। लेकिन उसी सड़क पर लगातार सड़क दुर्घटनाएं होना एक बड़ी चिंता का विषय है। अब ये सड़क शहर की व्यस्त सड़क बन गई है। ऐसे में इस सड़क पर वाहनों की गति पर कोई नियंत्रण नहीं है और यही वजह है कि यहां पर अक्सर सड़क हादसे होते हैं। ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने बताया कि इस सड़क पर साल में औसतन डेढ़ सौ से 200 सड़क हादसे होते हैं। जिनमें से केवल बड़ी दुर्घटनाएं ही रिपोर्ट होती है। हैड कांस्टेबल मुकेश कुमार ने सड़क के डिजाइन में सुधार और गति नियंत्रण के उपायों के बिना, यहां दुर्घटनाओं का सिलसिला जारी रह सकता है। डॉ. प्रेरणा अरोड़ा सिंह ने कहा कि अफसोस ये है कि हमारे यहां सुरक्षा एजेंसी भी हादसों को नियति मान लेती है। इनसे सबक लेकर उसमें सुधार नहीं किए जाते हैं। महल रोड के एनआरआई सर्किल पर इसी साल अगस्त में देर रात को दर्दनाक सड़क हादसे में दो स्टूडेंट सहित तीन की मौत हो गई थी। दरअसल, स्कोडा कार और ट्रक में जोरदार भिड़ंत हो गई थी। इस हादसे से सबक नहीं लिया और रोड इंजीनियरिंग की कमियों को दूर करने के कोई प्रयास नहीं किए गए। यही कारण है कि 1तीन महीने बाद ही एक बार फिर इसी रोड पर सड़क हादसे में एएसआई व ड्राईवर को अपनी जान गंवानी पड़ी। सीएम, उपराष्ट्रपति व डिप्टी सीएम की सुरक्षा में चूक पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लिए वीआईपी मूवमेंट के दौरान सुरक्षा व ट्रैफिक प्रबंधन करना चुनौती बनता जा रहा है। पहले सीएम भजनलाल शर्मा के काफिले की कार दुर्घटनाग्रस्त हुई। इसके ठीक पौन घंटे बाद, उपराष्ट्रपति के काफिले में भी एक बड़ी चूक हुई, जब एक गैस सिलेंडर से भरा ट्रक काफिले में घुस गया। इन घटनाओं के एक दिन बाद ही 13 दिसंबर को डिप्टी सीएम के जयपुर लौटते समय मौजमाबाद के पास नशे में ड्राइवर ने उनके काफिले में ट्रक घुसा दिया। कुछ समय के लिए डिप्टी सीएम के काफिले को सड़क किनारे रोकना पड़ा था। वीआईपी काफिले में सुरक्षा चूक के मामले ये घटनाएं नई नहीं है, जब वीआईपी काफिले में सुरक्षा चूक हुई हो। 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के काफिले में एक हिस्ट्रीशीटर ने घुसने की कोशिश की थी। घटना उस समय की थी जब सीएम राजे एयरपोर्ट से सिविल लाइंस अपने आवास लौट रही थीं। एक ऑडी कार ने काफिले को ओवरटेक करने की कोशिश की थी। जब पुलिस ने जांच की, तो पाया गया कि कार के ड्राइवर नशे में था और वह हिस्ट्रीशीटर जितेंद्र धारीवाल का था। इसी तरह, 2016 में जोधपुर दौरे के दौरान सीएम वसुंधरा राजे के काफिले की कार ने एक बाइक को टक्कर मार दी थी, हालांकि यह दुर्घटना गंभीर नहीं थी और बाइक सवार की जान बच गई। वीआईपी मूवमेंट के दौरान सख्त हो सुरक्षा व्यवस्था रिटायर्ड एडिशनल एसपी अनिल कुमार गोठवाल का कहना है कि सीएम काफिले के साथ हुई हाल की दुर्घटना इस बात की ओर इशारा करती हैं कि सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन में सुधार की जरूरत है। वीआईपी मूवमेंट के दौरान सुरक्षा उपायों को और कड़ा किया जाना चाहिए, और सड़क इंजीनियरिंग के मामलों में भी सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था में स्थानीय पुलिस और ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी तैनात रहते हैं। पुलिस की एक गाड़ी काफिले के साथ आगे चलती है, जिसका मुख्य उद्देश्य रास्ता साफ करना होता है। इसके अलावा, वीआईपी मूवमेंट से पहले, उस रास्ते की पूरी जांच और वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम पहले ही पूरे कर लिए जाते हैं। इसके बावजूद सुरक्षा में चूक व दुर्घटना होना बताता है कि अभी भी सुधार की जरूरत है। एक्सीडेंट होने पर ऐसे बचाए जिंदगी? सड़क हादसों में लोगों की जान बचाने वाली जयपुर की पद्मश्री डॉ. माया टंडन ने बताया कि जहां सीएम काफिले की कार दुर्घटना हुई। वहां सीएम भजनलाल शर्मा ने घायलों की मदद की और खुद अपनी कार से भी घायल को हॉस्पटिल लेकर गए। इससे आमजन को सीखना चाहिए। लेकिन, अक्सर दुर्घटना होने पर लोग घायलाें की मदद नहीं करते हैं और जो लोग मदद करना चाहते हैं, उन्हें इसके बारे में जानकारी नहीं है। डॉ. माया टंडन ने कहा कि लाइफ सेफ्टी को भी रोड सेफ्टी के बराबर ही अहमियत देने की जरूरत है, ताकि लोगों की जान बचाई जा सके। गोल्डन ऑवर के दौरान किसी भी घायल का इलाज शुरू हो जाना चाहिए। जिससे उसकी जान बचाई जा सके। डॉ. टंडन के मुताबिक प्राथमिक उपचार की जरूरी बातें केवल एम्बुलेंस कर्मियों, पुलिसकर्मियों को जानना जरूरी नहीं है बल्कि हर नागरिक को पता होनी चाहिए। यह भी पढ़ेंः मुख्यमंत्री के काफिले में घुसी टैक्सी, 2-गाड़ियों से भिड़ी:रोकने वाले ASI को उड़ाया, मौत; भजनलाल खुद अस्पताल लेकर गए थे


