ई-कॉमर्स कंपनी अमेजॉन से ब्रांडेड सामान खरीदने पर भी नकली प्रोडक्ट मिलने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जोधपुर की कंज्यूमर कोर्ट-II ने एक अहम फैसले में अमेजॉन इंडिया को नकली टाइटन घड़ी बेचने का दोषी माना है। आयोग ने कंपनी पर सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए 25 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। आयोग के अध्यक्ष डॉ. यतीश कुमार शर्मा और सदस्य डॉ. अनुराधा व्यास की बेंच ने यह बुधवार को फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म केवल ‘मध्यस्थ’ होने का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। क्या था मामला: पति के लिए मंगवाई थी घड़ी दरअसल, चौपासनी हाउसिंग बोर्ड निवासी परिवादिया अनाहिता अली ने अधिवक्ता महेंद्र पारीक के जरिए परिवाद दायर किया था। इसमें उन्होंने बताया कि 5 अप्रैल 2022 को उन्होंने अपने पति नौशाद को गिफ्ट देने के लिए अमेजॉन से ‘टाइटन करिश्मा एनालॉग’ घड़ी ऑर्डर की थी। इसके लिए उन्होंने 2,695 रुपये का भुगतान किया। घड़ी मिलने के कुछ दिन बाद ही वह बंद हो गई। जब 28 जून 2022 को इसे ठीक करवाने के लिए टाइटन के अधिकृत सर्विस सेंटर ले जाया गया, तो वहां के कर्मचारियों ने जॉब शीट पर साफ लिख कर दिया कि यह “डुप्लीकेट घड़ी” है और इसे कंपनी द्वारा रिपेयर नहीं किया जा सकता। अमेजॉन की दलील: हम तो बस प्लेटफॉर्म हैं कोर्ट में अमेजॉन ने अपने बचाव में आईटी एक्ट की धारा 79 का हवाला देते हुए तर्क दिया कि वह केवल एक मध्यस्थ है। कंपनी ने कहा कि खरीद-फरोख्त परिवादिया और तीसरे पक्ष के विक्रेता वीआरपी टेलिमेटिक्स के बीच हुई है, इसमें अमेजॉन की कोई भूमिका नहीं है, इसलिए उस पर केस नहीं बनता। कोर्ट की सख्त टिप्पणी: भरोसे के साथ खिलवाड़ आयोग ने अमेजॉन की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अमेजॉन ने विक्रेता को अपने प्लेटफॉर्म पर ‘सर्टिफाइड सेलर’ के रूप में लिस्ट किया था, जिससे ग्राहक का भरोसा बनता है। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “नकली सामान की आपूर्ति न केवल उपभोक्ता को व्यक्तिगत क्षति पहुंचाती है, बल्कि पूरी ई-कॉमर्स व्यवस्था की विश्वसनीयता को भी खत्म करती है।” कोर्ट ने माना कि ब्रांडेड बताकर नकली घड़ी भेजना गंभीर ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ है। आदेश: 45 दिन में चुकाने होंगे पैसे आयोग ने परिवाद का निपटारा करते हुए अमेजॉन इंडिया को आदेश दिया है कि वह: कोर्ट ने यह कुल राशि 32 हजार 695 रुपए चुकाने के लिए 45 दिन का समय दिया है। यदि तय समय में भुगतान नहीं किया गया, तो पूरी राशि पर 9 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा।


