हनुमानगढ़ के कोहला गांव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में एक हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में सामाजिक समरसता और ‘पंच परिवर्तन’ के विचारों पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य 2047 तक भारत को सशक्त और विकसित राष्ट्र बनाने के लिए गांव स्तर पर स्थायी व्यवस्था और कार्ययोजना तैयार करना था। सम्मेलन के मुख्य वक्ता संघ के विभाग प्रचारक रघुवीर रहे। मंच पर कार्यक्रम के संरक्षक महंत राजूनाथ, गोशाला अध्यक्ष ओम ज्यानी और मंदिर समिति अध्यक्ष रामेश्वर सहारन उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत गांव की महिलाओं द्वारा प्रस्तुत भजनों से हुई, जिसके बाद महंत राजूनाथ के भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय हो गया। अपने संबोधन में मुख्य वक्ता रघुवीर ने संघ के ‘पंच परिवर्तन’ के विचारों को विस्तार से समझाया। उन्होंने राष्ट्र निर्माण के लिए सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य, स्वदेशी भावना, पर्यावरण संरक्षण और कुटुंब प्रबोधन को आवश्यक बताया। रघुवीर ने कहा कि इन मूल्यों को व्यवहार में लाकर ही समाज और देश को सशक्त बनाया जा सकता है। खंड सह संयोजक विजय कुमार ने बताया कि सम्मेलन के आयोजन के लिए गांव समिति ने सामाजिक समरसता के तहत हर घर से सहयोग प्राप्त किया। इस दौरान लगभग 80 किलो दूध, 20 किलो घी और करीब 12 हजार रुपए की आर्थिक सहायता एकत्र हुई। इस सहयोग से भंडारे और प्रसाद की व्यवस्था की गई, जिसे सभी उपस्थित लोगों ने ग्रहण किया। महंत राजूनाथ ने अपने संबोधन में सामाजिक एकता का संदेश दिया और जाति-भेद से ऊपर उठकर समाज को जोड़ने की अपील की। सम्मेलन का समापन भारत माता की आरती के साथ किया गया। कार्यक्रम के बाद, विभाग प्रचारक रघुवीर ने कार्यकर्ताओं के साथ एक बैठक की और संगठनात्मक विषयों पर चर्चा की।


