इंदौर में कानून की रखवाली करने वाली वर्दी पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। ब्राउन शुगर के आरोप में पकड़े गए गंभीर रूप से बीमार युवक की जिला जेल में मौत के बाद सामने आए आरोपों ने पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया, गिरफ्तारी की वैधता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पीड़ित परिवार का दावा है कि युवक को बिना एफआईआर घर से उठाया गया, अवैध वसूली की गई और बाद में झूठे एनडीपीएस केस में फंसाया गया। जब पुलिस स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो जिला न्यायालय ने एमआईजी थाने के 9 पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। मामला 15 नवंबर 2024 का है। आरोप है कि जिस युवक को पुलिस ने घर से उठाया था वह टीबी का मरीज था। उसकी बहन राधिका सोनी पुत्री सुरेश सोनी, निवासी प्रकाशचंद्र सेठी नगर ने 23 मई 2025 को पुलिस कमिश्नर को शिकायत सौंपी थी। शिकायत में भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2), 127(2), 140(3), 201, 217, 229, 233, 238, 257, 308(6), 61(बी) और एनडीपीएस एक्ट की धारा 58 के तहत एमआईजी थाने के 9 पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर राधिका ने वकील कृष्ण कुमार कुन्हारे एवं डॉ. रूपाली राठौर के माध्यम से जिला न्यायालय इंदौर में 8 जनवरी 2026 को परिवाद पेश किया। जिसके बाद कोर्ट ने जांच के आदेश दिए हैं। पीड़िता ने न्यायालय को बताया कि उसके भाई अजय सोनी को शासकीय टीबी अस्पताल इंदौर से छुट्टी दिलाकर घर लाया गया था। डॉक्टरों की सलाह अनुसार परिवार उसकी देखभाल कर रहा था। बीमारी के कारण अजय का वजन लगभग 30 किलो रह गया था। डॉक्टरों ने भी जवाब दे दिया था। घर से उठाकर ले गई थी पुलिस
पीड़िता के अनुसार, 15 नवंबर 2024 को एमआईजी थाने के 6 पुलिसकर्मी, जिनमें एक पुलिसकर्मी प्रवीण सिंह (ब्लैक रंग का ट्रैक सूट पहने) शामिल था, एक युवक पोलार्ड के साथ राधिका के घर पहुंचे। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने बिना किसी एफआईआर के जबरन घर में घुसकर तलाशी ली। गद्दे के नीचे रखा अजय का आधार कार्ड उठाकर अपनी जेब में रख लिया और अजय को जबरन अपने साथ ले जाने लगे। परिवार ने अजय की गंभीर बीमारी की जानकारी पुलिस को दी, लेकिन पुलिसकर्मियों ने 1–2 घंटे में पूछताछ कर छोड़ने की बात कहकर उसे साथ ले लिया। इस दौरान पुलिस अजय के पिता सुरेश सोनी की एक्टिवा भी अपने साथ ले गई। अवैध वसूली के भी लगाए आरोप
दोपहर लगभग 12 बजे, अजय के पिता सुरेश सोनी के पहुंचने पर पुलिसकर्मी प्रवीण सिंह ने कथित तौर पर 40 हजार रुपए की अवैध मांग की। परिवार ने 25 हजार रुपए देने पर एक्टिवा छुड़ाई, जबकि शेष 40 हजार देने पर अजय को छोड़ने की बात कही गई। पीड़ित के घर 6 पुलिसकर्मी आए थे, लेकिन अवैध वसूली के आरोप सहित कुल 9 पर आरोप लगाए गए हैं। झूठी गिरफ्तारी दिखाने का भी आरोप
राधिका सोनी के अनुसार, अजय को किसी अन्य स्थान पर ले जाकर उसकी कमर पर बंदूक अड़ाकर एक वीडियो बनाया गया। इसके बाद सोची-समझी साजिश के तहत अजय को 15 नवंबर 2024 की रात 9:19 बजे सिंगापुर बिजनेस बिल्डिंग के पीछे, अयोध्यापुरी, इंदौर से 9.10 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ झूठे तौर पर गिरफ्तार दिखाया गया। आरोप है कि प्रवीण सिंह सहित 9 पुलिसकर्मी- आरक्षक, प्रधान आरक्षक, चालक और सब-इंस्पेक्टर ने झूठी जब्ती और गिरफ्तारी के गवाह बनाकर केस दर्ज किया। अगले दिन अजय को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। जेल में रहते हुए अजय कथित तौर पर पुलिस की झूठी रिपोर्ट और सदमे में आ गया। बीमारी की हालत बिगड़ने पर 12 दिसंबर 2024 को उसकी मौत हो गई। मौत की सूचना केंद्रीय जेल प्रशासन के जरिए परिवार को दी गई, जिसके बाद परिजन एमवाय अस्पताल पहुंचे। कोर्ट में सीसीटीवी फुटेज भी पेश किए
अधिवक्ता कृष्ण कुमार कुन्हारे और डॉ. रूपाली राठौर ने बताया कि अजय को दोपहर 12:40 बजे घर से उठाकर ले जाया गया था, जबकि गिरफ्तारी रात 9:19 बजे दूसरी जगह दिखाई गई। घर से ले जाने की पूरी घटना कॉलोनी के सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई है। सीसीटीवी फुटेज, स्क्रीनशॉट और पेनड्राइव अदालत में पेश किए गए हैं। न्यायालय ने राधिका सोनी के कथन लेखबद्ध कर लिए हैं। पहले के मामलों की मिसाल भी पेश की लोकायुक्त ने भी शुरू की जांच
डॉ. रूपाली राठौर ने बताया कि अजय को दिनभर थाने में असंवैधानिक रूप से रखने और इसकी प्रविष्टि जनरल डायरी व रोजनामचे में दर्ज न करने को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय, डीजीपी, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और लोकायुक्त में शिकायत की गई है। शिकायत में मप्र सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3(3ए), म.प्र. पुलिस रेगुलेशन के पैरा 64(3), 64(4), 64(11) के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। सूत्रों के अनुसार लोकायुक्त पुलिस, जिला इंदौर ने पीड़िता के बयान और सबूत लेकर पूरी फाइल भोपाल कार्यालय भेज दी है। ये खबरें भी पढ़ें… 12वीं टॉपर छात्र को बनाया ड्रग तस्कर, जेल भेजा मंदसौर पुलिस की ऐसी करतूत उजागर हुई, जिसे देखकर हाईकोर्ट भी सन्न रह गया। मल्हारगढ़ थाना पुलिस ने एक बेगुनाह छात्र को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ ड्रग स्मगलिंग का केस दर्ज किया और उसे जेल भी भेज दिया। जब पीड़ित छात्र के परिजन ने हाईकोर्ट की शरण ली तब कोर्ट में CCTV फुटेज और वीडियो से पता चला कि पुलिस ने झूठा केस बनाया है। पुलिस की कारस्तानी सामने आने के बाद हाईकोर्ट को भी कहना पड़ा कि इसमें पूरा थाना लिप्त है।पूरी खबर पढ़ें सुप्रीम कोर्ट में झूठा हलफनामा पेश करने का मामला इंदौर के एडिशनल डीसीपी दिशेष अग्रवाल और चंदन नगर थाना प्रभारी इंद्रमणि पटेल को सुप्रीम कोर्ट ने झूठा हलफनामा पेश करने के मामले में कड़ी फटकार लगाई है। पुलिस अधिकारियों ने आरोपी अनवर हुसैन की जमानत का विरोध करते हुए अदालत में हलफनामा जमा किया था, जिसमें दावा किया गया था कि अनवर पर कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। मामले की सुनवाई 4 नवंबर को हुई थी।पूरी खबर पढ़ें हाईकोर्ट बोला- हथकड़ी लगाई थी तो बेड़ियां भी बांध देते इंदौर में पुलिस ने नाबालिग से रेप के आरोपी रियल एस्टेट कारोबारी संजय दुबे के बेटे राजा को 30 घंटे तक थाने में बिठाए रखा। हथकड़ी भी लगा दी। मामले में गुरुवार को हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में सुनवाई हुई। डबल बेंच ने पुलिस से कहा- हथकड़ी तो लगाई थी, बेड़ियां भी पहना देते। कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को मामले में जिम्मेदार टीआई और पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने और आपराधिक मामला दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।पूरी खबर पढ़ें


