एसओजी की गिरफ्त में आए तत्कालीन उपनिदेशक (सिस्टम एनालिस्ट) संजय माथुर और प्रोग्रामर प्रवीण गंगवाल 2014 से कर्मचारी चयन बोर्ड में जमे हुए थे। इन्होंने 2018 की भर्तियों में ओएमआर शीट स्कैनिंग और अंकों में हेरफेर कर अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाया। यह हेराफेरी बिना सिस्टम तक सीधी पहुंच के संभव ही नहीं थी। एडीजी विशाल बंसल ने बताया 2014 से अब तक की भर्तियों की जानकारी जुटाई जा रही है। इन दोनों कर्मचारियों के कार्यकाल में बोर्ड को 5 चेयरमैन मिले, लेकिन सिस्टम में गड़बड़ चल रही थी, किसी को भनक नहीं लगी। एसओजी की कार्रवाई ने भी बोर्ड के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए हैं। 2018 की तीन बड़ी भर्ती परीक्षाओं-सुपरवाइजर (महिला अधिकारिता), प्रयोगशाला सहायक और कृषि पर्यवेक्षक में ओएमआर शीट में मनमर्जी से नंबर बढ़ाए। 2014 से चेयरमैन बदलते रहे, पर दोनों जमे रहे कंपनी बदली, लेकिन स्टाफ वही बोर्ड में चार चेयरमैन बदलने के बावजूद सिस्टम सेक्शन में अधिकारी-कर्मचारी वही थे। इनकी गतिविधियों पर कोई प्रभावी निगरानी नहीं की गई। नतीजा यह हुआ कि शिकायतें आती रहीं, लेकिन फाइलों में दबी रहीं और घपले चलते रहे। इसके बाद 3 अन्य कंपनियां काे काम मिला। आशंका है कि उनसे भी यह गठजोड़ चलता रहा।


