कफ सिरप कांड हो या जिला अस्पताल से मिले माउथ वॉश में कीड़ा निकलने का मामला, यह केस मध्यप्रदेश में मरीजों को दी जा रहीं दवाओं के गिरे हुए स्तर को उजागर करता है। लेकिन, चिंता का विषय यह है कि साल 2025 में खराब क्वालिटी वाली दवाओं के 4 से 5 ही चर्चित केस लोगों के सामने आए। जबकि हकीकत में स्थिति इसके कई गुना अधिक चिंताजनक है। मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड में बीते साल एक नहीं बल्कि अमानक दवाओं के 25 केस दर्ज हुए। इनमें मल्टी विटामिन, ओआरएस, दर्द की दवा से लेकर ह्रदय और किडनी रोगियों को दी जाने वाली लाइफ सेविंग ड्रग्स तक शामिल हैं। सरकारी और निजी अस्पतालों व फार्मेसी के कुल दवा कारोबार को देखें, तो यह आंकड़ा 10 हजार करोड़ से अधिक का है। पूरे प्रदेश से आ रहे अमानक दवाओं के मामले मध्यप्रदेश में अमानक दवाओं के मामले सतना, कटनी, जबलपुर, शाजापुर समेत प्रदेश के अन्य जिलों से आए हैं। इनके अलावा हाल ही में राजधानी के जिला अस्पताल में दो शिकायतें दर्ज हुईं। जिसमें एक केस में फफूंद लगी दवा मरीजों को दे दी गई तो दूसरे मामले में अस्पताल से जो माउथ वॉश दिया गया, उसमें कीड़ा होने की बात कही गई। दोनों मामलों में अस्पताल प्रबंधन ने दवाओं के सैंपल जब्त कर लिए थे। शिकायतकर्ता को एक सप्ताह में इनकी रिपोर्ट बताने की बात कही गई थी। लेकिन, अब तक इन दवाओं की रिपोर्ट नहीं आई है। मामले में भोपाल सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि माउथ वॉश में कीड़े होने की शिकायत मिली थी। सैंपल को जांच के लिए भेज दिया गया है। जल्द ही रिपोर्ट आने से स्थिति साफ हो जाएगी। मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हाल ही में जेपी अस्पताल में क्वालिटी इंस्पेक्शन कराया गया था। सबसे ज्यादा अमानक दवाएं मई माह में मिली मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड में सबसे ज्यादा 7 अमानक दवाओं के मामले साल 2025 के मई माह में मिले। जिसमें कार्रवाई करते हुए संबंधित बैच की दवा पर तत्काल रोक लगा दी गई थी। वहीं, खराब दवाएं सप्लाई करने वाली कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई भी की गई। मई माह के बाद दिसंबर में चार दवाएं अमानक मिली थी। वहीं, अगस्त और अक्टूबर में 3-3 दवाएं खराब क्वालिटी की होने की बात सामने आई थी। ये दवाएं टाइफाइड, फेफड़ों व मूत्र संक्रमण, खांसी, अस्थमा, एलर्जी और पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियों के इलाज में दी जाती हैं। एक साल में 25 दवाएं मिली अमानक यह भी पढ़ें… 1. 60 हजार मेडिकल स्टोर…जांचने वाले सिर्फ 79 ड्रग इंस्पेक्टर मध्यप्रदेश में करीब 10 हजार करोड़ का दवा कारोबार है। यह हर साल 5.7% यानी लगभग 600 करोड़ की दर से बढ़ रहा है। इतने बड़े मार्केट की मॉनिटरिंग के लिए राज्य में सिर्फ 79 ड्रग इंस्पेक्टर (DI) हैं। जबकि दवाओं के सैंपल की जांच के लिए केवल 3 एक्टिव लैब हैं। इनमें भी सिर्फ भोपाल की लैब पूरी तरह फंक्शनल है। इसी कमजोर सिस्टम के कारण कोल्ड्रिफ, रीलाइफ और रेस्पिफ्रेस टीआर जैसे जहरीले सिरप बाजार में बेरोक-टोक बेचे जाते रहे। हालात इतने गंभीर हैं कि मध्यप्रदेश में जहरीले कफ सिरप से छिंदवाड़ा, बैतूल, नागपुर और पांढुर्णा में अब तक 23 बच्चों की मौत हो चुकी है। पढ़ें पूरी खबर 2. मरीजों को घटिया दवाओं से बचाएगा सेंट्रल वेयरहाउस
सरकारी अस्पतालों में इलाज के नाम पर मरीजों को सुरक्षित और असरदार दवाएं मिलने का भरोसा अब सवालों के घेरे में है। तमाम दावों और निगरानी तंत्र के बावजूद मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों में लगातार अमानक दवाएं सामने आ रही हैं। जनवरी से अब तक करीब दो दर्जन दवाएं गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतर पाईं। चिंता की बात यह है कि जांच रिपोर्ट आने तक हजारों मरीज इन दवाओं का सेवन कर चुके होते हैं। यानी नुकसान सामने आने के बाद ही सिस्टम हरकत में आता है। पढ़ें पूरी खबर 3. जेपी अस्पताल… फफूंद लगी दवा के बाद माउथवॉश में कीड़ा
मध्यप्रदेश के 25 से ज्यादा बच्चों की जान लेने वाले कोल्ड्रिफ सिरप के बाद भी अस्पतालों में खराब क्वालिटी वाली दवाएं लगातार सामने आ रहीं हैं। स्थिति यह है कि जेपी अस्पताल में मरीजों को इलाज के नाम पर दी जा रहीं दवाएं खुद ही बीमार हैं। साल 2026 में अभी 9 दिन ही बीते हैं और राजधानी के जिला अस्पताल से मरीजों को खराब दवा देने के दो केस सामने आ चुके हैं। पढ़ें पूरी खबर


