निरंजनपुर की गलियों में तेज गति में बाइक दौड़ाकर 8 साल के मासूम की जान लेने वाले 21 साल के युवक पर पुलिस ने मानव वध जैसी गंभीर धारा में केस दर्ज किया है। बाइक सवार रितिक (21) पिता अर्जुन भदौरिया निवासी निरंजनपुर नई बस्ती ने 20 जनवरी की शाम 4 बजे स्कूल से घर लौट रहे 8 साल के शिवांक पिता ज्ञानीशंकर को टक्कर मार दी थी। उसकी मां घर का दरवाजा खोल ही रही थी कि बिना नंबर की बाइक को गली में अंधाधुंध गति से दौड़ाते हुए रितिक ने मासूम शिवांक को चपेट में ले लिया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। पुलिस ने उसके खिलाफ बीएनएस की धारा 105 (304 आईपीसी) के तहत केस दर्ज कर उसे जेल भेजा है। इन हादसों में लगी ऐसी धारा जुर्माना व आजीवन कारावस तक संभव बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 105 को मानव वध की श्रेणी में रखा जाता है। हालांकि यह हत्या की श्रेणी में नहीं आता। यानी इसमें जान लेने का सीधा इरादा शामिल नहीं होता, लेकिन जानबूझकर किया गया ऐसा कृत्य जिससे मृत्यु होने की आशंका हो, इसमें सम्मिलित है। सजा: ऐसे मामलों में 5 से 10 साल की कैद और जुर्माना हो सकता है। अधिकतकम आजीवन कारावास की सजा भी संभव है। कई बार टोका, पर मानता नहीं था लोगों ने पुलिस को बताया कि रितिक हमेशा निरंजनपुर, नई बस्ती और देवास नाका की गलियों में बिना नंबर की बाइक तेजी से दौड़ाता था। कई बार उसे समझाया भी कि ऐसा करने से कोई दुर्घटना हो सकती है। इसके बावजूद रितिक में कोई सुधार नहीं हुआ।


