राजधानी के एकमात्र शासकीय डेंटल कॉलेज में स्टाइपेंड को लेकर जूनियर डॉक्टर, रेजिडेंट डॉक्टर और इंटर्न ने गुरुवार को अस्पताल के गेट पर ताला जड़ दिया और प्रदर्शन करने लगे। इसके चलते सुबह से ही दांत दर्द, सूजन, संक्रमण और सर्जरी के लिए आए मरीज कॉलेज परिसर में भटकते रहे। कई मरीज घंटों इंतजार के बाद बिना इलाज के लौट गए। बुजुर्ग, महिलाएं और ग्रामीण इलाकों से आए मरीज सबसे ज्यादा परेशान दिखे। तालाबंदी के चलते सीनियर डॉक्टर और प्रोफेसर समेत सभी परिसर में ही बैठे रहे। छात्रों ने उन्हें भी अंदर जाने नहीं दिया। सुबह साढ़े 8 बजे से बैठे छात्रों को समझाने डीएमई, एसडीएम पहुंचे, लेकिन छात्रों ने कहा जब तक कोई लिखित आदेश नहीं आ जाता तब तक वे हड़ताल खत्म नहीं करेंगे। 7 घंटे बाद करीब साढ़े 3 बजे पुलिस छात्रों को उठाकर तूता धरना स्थल ले गई। इमरजेंसी के लिए लगाई टेबल, पर गंभीर मरीज इलाज के लिए भटकते रहे डेंटल कॉलेज में इलाज के लिए रोजाना 500 से ज्यादा मरीज पहुंचते हैं। बीते 6 दिन से लगातार छात्रों के प्रदर्शन से मरीज भी घटे थे। इसके बाद गुरुवार को तालाबंदी करने से इलाज पूरी तरह प्रभावित हो गया। इलाज चालू रखने छात्रों ने प्रदर्शन के बीच एक टेबल लगाकर रखा, जिसमें वे इमरजेंसी केस देख रहे थे। इसके बाद भी कई मरीज अस्पताल आकर बिना इलाज कराए ही वापस लौटते रहे। इनमें किसी को दांत का एक्सरे कराना था, जिससे यह पता चलता की दांत में कहां क्या दिक्कत है। साथ ही किसी को दांत लगवाना था, किसी को जबड़ा ठीक करवाना था तो कोई एक्सीडेंट के बाद डेंटल कॉलेज पहुंचा था। केस- 1 इलाज के लिए भटकते रह गए धमतरी के मगरलोड, चारभाठा से आए एक बुजुर्ग ने बताया कि एक दुर्घटना में उनका जबड़ा टूट गया है। उसका इलाज कराने उन्हें मेकाहारा से डेंटल कॉलेज भेजा गया है। लेकिन वे बाहर ही भटकते रहे। केस- 2 अंबिकापुर से आए, डॉक्टर नहीं देखे कैंसर का इलाज कराने अंबिकापुर से आए एक बुजुर्ग ने कहा कि वह फॉलोअप के लिए पहुंचे थे। लेकिन यहां हड़ताल हो रहा था, इसलिए वे अब वापस जा रहे हैं। इस दौरान उन्हें एक पीजी छात्र ने टेबल पर बैठाकर देखा, फिर अगले हफ्ते आने कहा। मेडिकल-आयुर्वेद को अधिक, डेंटल छात्रों को कम पैसे, इसलिए हड़ताल हड़ताल पर बैठे पीजी और इंटर्न छात्रों की दो प्रमुख मांग स्टाइपेंड में समानता और गर्ल्स हॉस्टल की सुविधा है। छात्रों का कहना है कि डेंटल इंटर्न (बीडीएस) को जहां 12,600 रुपए प्रति माह स्टाइपेंड मिलता है, वहीं मेडिकल और आयुर्वेद (एमबीबीएस-बीएएमएस) इंटर्न को इससे अधिक 15,900 रुपए प्रति माह दिया जाता है। इसी तरह डेंटल पीजी प्रथम वर्ष के छात्रों को 53,550 रुपए, द्वितीय वर्ष को 56,700 रुपए और तृतीय वर्ष को 59,200 रुपए स्टाइपेंड मिलता है, जबकि मेडिकल एवं आयुर्वेद पीजी (एमडी/एमएस-बीएएमएस) में यह राशि कहीं ज्यादा है। यहां पीजी प्रथम वर्ष के छात्रों को 67,500 रुपए, द्वितीय वर्ष को 71,450 रुपए और तृतीय वर्ष के छात्रों को 74,600 रुपए प्रति माह स्टाइपेंड दिया जा रहा है। इससे स्पष्ट है कि मेडिकल और आयुर्वेद छात्रों को डेंटल छात्रों की तुलना में अधिक स्टाइपेंड मिल रहा है।


