शेरनी सुनैना चार दिन से लापता:एनक्लोजर में छोड़ा, फिर शेल्टर में नहीं लौटी, ड्रोन से खोज रहे वनकर्मी, सवाल- फेंसिंग से बाहर या अंदर

सज्जनगढ़ सेंचुरी में तैयार की गई लॉयन सफारी से जुड़ा चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एनक्लोजर में छोड़ी गई शेरनी सुनैना 4 दिन से लापता है। वह होल्डिंग एरिया में नहीं लौटी है। इससे वन विभाग की चिंता बढ़ गई है। सुनैना की तलाश में कर्मचारी पहाड़ी पर बने क्लाउड-9 के कमरों की छत पर बैठकर निगरानी कर रहे हैं। ढोल बजाने के साथ ड्रोन उड़ाकर भी शेरनी को खोजा जा रहा है। शेर सम्राट और शेरनी सुनैना को सोमवार को ही होल्डिंग एरिया से खुले बाड़े में छोड़ा गया था। सम्राट तो नाइट शेल्टर में लौट आया, लेकिन सुनैना अब तक नहीं आई। विभाग का दावा है कि वह एनक्लोजर के भीतर ही मौजूद है। गुजरात से लाए जाने के बाद सुनैना 18 माह तक पिंजरे में बंद रही। विभाग पर यह सवाल उठ रहा है कि शेरों को एनक्लोजर में छोड़ने से पहले वहां मौजूद 5 से 7 चीतलों को बाहर क्यों नहीं निकाला गया। जब तक चीतलों का शिकार नहीं कर लेती, उसके शेल्टर में लौटने की संभावना कम है। विभाग का दावा है कि बुधवार को सुनैना को क्लाउड-9 के पास देखा गया था। बता दें कि 5.19 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली सज्जनगढ़ सेंचुरी के 20 हेक्टेयर में लॉयन सफारी तैयार की गई है। इस पर 3.50 करोड़ रु. खर्च किए गए हैं। छह माह पहले भी हवाला गांव की ओर फेंसिंग के पास तेंदुआ चहलकदमी करता नजर आया था। डीएफओ बोले- जंगल रास आया, कुछ दिन बाद खुद ढूंढ लेगी ठिकाना डीएफओ यादवेंद्र सिंह चूंडावत ने बताया कि अगले माह लॉयन सफारी के उद्घाटन की तैयारी को देखते हुए शेरों के जोड़े को रिलीज किया गया। शेर नियमित रूप से शेल्टर में लौट रहा है, जबकि शेरनी को जंगल रास आ गया है। सफारी क्षेत्र में घास और झाड़ियां अधिक होने के कारण वह बार-बार छिप जाती है। कुछ दिन एनक्लोजर में घूमने के बाद उसे अपने खाने-पीने की जगह का पता चल जाएगा। निर्माण पर उठ चुके सवाल.. तेज हवा से उड़ गई थी फेंसिंग
गत वर्ष 20 मई को तेज हवा के चलते क्लाउड-9 के पास सफारी की फेंसिंग गिर गई थी। भास्कर ने 28 मई को इसका खुलासा किया था। इसके बाद वन विभाग ने ठेकेदार और तत्कालीन अधिकारियों को नोटिस जारी किया था। उस समय निर्माण गुणवत्ता पर भी सवाल उठे थे। पड़ताल में सामने आया था कि फेंसिंग के नीचे कई स्थानों पर गैप था, जिससे तेंदुए और कुत्तों का आना-जाना संभव था।

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