भागीरथपुरा; अब नई चिंता, ठीक होकर फिर गंभीर स्थिति में पहुंचे, 2 वेंटिलेटर पर, एक कोमा में, मल्टी ऑर्गन, न्यूरो से जुड़ी जटिलताएं

भागीरथपुरा में दूषित जल से बीमार लोग ठीक होकर फिर गंभीर स्थिति में पहुंच रहे। ज्यादातर वे पीड़ित हैं, जो पहले से किसी न किसी बीमारी से जूझ रहे थे। 7 गंभीर मरीजों का इलाज जारी है। हाई ब्लड प्रेशर के 683 और डायबिटीज के 344 हाई-रिस्क मरीज सामने आए हैं। बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती 65 वर्षीय एकनाथ सूर्यवंशी की हालत सबसे गंभीर है। डॉक्टरों के अनुसार वे मल्टी ऑर्गन डिस्फंक्शन सिंड्रोम और एन्सेफेलोपैथी से पीड़ित हैं। उन्हें आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। अब वे कोमा में हैं। डॉक्टरों का कहना है, मरीजों की वर्तमान गंभीर स्थिति का मुख्य कारण डायरिया नहीं, बल्कि पहले से मौजूद न्यूरोलॉजिकल और मल्टी सिस्टम बीमारियां हैं। संक्रमित हुए, फिर ठीक हुए, 4 दिन पहले फिर गंभीर बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती भागीरथपुरा निवासी 65 वर्षीय अनीता कुशवाहा भी सेंसरी मोटर पॉलीन्यूरोपैथी से पीड़ित हैं। उनकी हालत गंभीर हैं और उन्हें भी वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा है। इलाज के तहत प्लाज्मा फेरिसिस की प्रक्रिया की जा रही है और ट्रेकियोस्टॉमी की तैयारी है। 17 जनवरी को पांचवीं मंजिल स्थित एचडीयू वार्ड में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उनसे मुलाकात कर हालचाल पूछे थे। बेटे निलेश कुशवाहा ने बताया कि 3 जनवरी से मां का बॉम्बे हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। 5 बार डायलिसिस हो चुका है। वे पहले ठीक थीं, लेकिन 19 जनवरी के बाद अचानक हालत बिगड़ने लगी। प्लाज्मा भी चढ़ाया जा रहा है। अन्य अस्पतालों में भर्ती मरीजों की स्थिति ये मामले भी ठीक होकर गंभीर स्थिति में पहुंच गए भास्कर एक्सपर्ट डॉ. विष्णुदत्त शर्मा, मेडिसिन रोग विशेषज्ञ ऐसे बढ़ रहा जोखिम- दूषित पानी से होने वाले उल्टी-दस्त शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन और डिहाइड्रेशन पैदा करते हैं। बीपी और शुगर के मरीजों के लिए यह स्थिति खतरनाक होती है। पानी की कमी से रक्त गाढ़ा होता है और दिल, किडनी जैसे अंगों पर दबाव बढ़ता है। ऐसे मरीज अचानक सेप्सिस या मल्टी-ऑर्गन फेल्योर की स्थिति में भी पहुंच सकते हैं।

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