हैदराबाद में बड़े भाई के कहने पर पढ़ाई अधूरी छोड़कर बिजनेस संभाला। आठ साल तक दिन-रात मेहनत की, लेकिन काम का दबाव, नींद की कमी ने थका दिया। तीनों भाई शहर में सैटल थे। पिता की तबीयत बिगड़ी तो गांव लौटकर किराना की दुकान शुरू की। सोचा यही सहारा बनेगी, लेकिन कोरोना काल ने इस सपने पर भी पानी फेर दिया। दो साल तक बेरोजगारी की मार झेलते रहे। तभी एक दोस्त की सलाह ने जिंदगी की दिशा बदल दी। खेत में ट्यूबवेल लगवाने का फैसला किया, घर गिरवी रखकर बैंक से लोन लिया और खेती में किस्मत आजमाई। पहले ही साल नागौरी मेथी (कसूरी मेथी), जीरा और ईसबगोल की खेती से करीब 22 लाख रुपए का मुनाफा हुआ। तीन साल में कर्जा लगभग उतर गया। व्यापारी से किसान बने वेदप्रकाश को खेती का डिसीजन उनके लिए मुनाफे वाला साबित हुआ। खेती किसानी में आज कहानी नागौर के किसान वेदप्रकाश सांखला की… चार भाइयों का परिवार, तीन हैदराबाद में सेटल नागौर जिले के किसान वेदप्रकाश सांखला (39) पिछले तीन वर्षों से नागौरी मेथी की खेती कर रहे हैं। इस बार 12 बीघा जमीन में मेथी की फसल उगाई है। वेदप्रकाश ने बताया- चार भाइयों में सबसे छोटा हूं। बड़े भाई के कहने पर 2003 में दसवीं की पढ़ाई अधूरी छोड़कर हैदराबाद का चला गया था। बड़े भाई की मिठाई की दो दुकानों में से एक दुकान वे संभालता था। उस समय भी पिता हरिराम सांखला (88) ठेकेदारी का काम करते थे। वैसे तो सबकुछ ठीक चल रहा था। चारों भाइयों के हैदराबाद जाने के बाद गांव में माता-पिता की देखभाल करने वाला कोई नहीं था। पिता के बीमार होने पर 2011 में गांव लौट आया। थका देने वाली जिंदगी से मिली राहत हैदराबाद में ज्यादा काम और कम नींद की वजह से वेदप्रकाश की सेहत बिगड़ गई थी और उनका वजन भी बढ़ गया था। लेकिन अब खेत में काम करने से वे फिर से स्वस्थ हो गए हैं। रोज 8 से 10 घंटे मेहनत करने से वे पहले से ज्यादा फिट हो गए हैं। अब उन्हें पूरी नींद मिलती है साथ में परिवार की जिम्मेदारी भी निभा रहा हूं। वापस लौटकर किराने की दुकान चलाई शुरुआत में समझ नहीं आ रहा था कि गांव में क्या करेंगे। गांव लौटने के बाद वेदप्रकाश ने करीब 9 साल तक किराने की दुकान चलाई। लॉकडाउन के दौरान दुकान भी बंद हो गई। इसके बाद दो साल तक रोजगार की तलाश में भटकते रहे। इसी दौरान एक दोस्त ने उन्हें खेती करने की सलाह दी। लेकिन समस्या पानी की थी। साल 2023 में दोस्त के कहने पर खेत में ट्यूबवेल कराया गया। मीठा पानी निकलते ही उन्होंने खेती शुरू कर दी। मकान गिरवी रखकर बैंक से लोन लिया वेदप्रकाश ने बताया- उनके पिता ने 1980 में 24 बीघा और 1990 में 10 बीघा जमीन खरीदी थी। वर्तमान में परिवार के पास कुल 58 बीघा जमीन है। इसके अलावा उन्होंने 2020 में 16 बीघा जमीन 32.16 लाख में खरीदी। वैसे तो पुस्तैनी 102 बीघा जमीन थी, लेकिन दादा ने पहले ही जमीन बुआ को गिफ्ट कर दी थी। शुरुआत में 30 बीघा में नागौरी मेथी लगाई और इसके साथ में 20 बीघा जमीन पर ईसबगोल की खेती की। लीज पर जमीन लेकर 25 बीघा में जीरा लगाया। पहले साल करीब 22 लाख रुपए का मुनाफा हुआ, जबकि कुल खर्च करीब 28 लाख रुपए आया। इसके लिए घर गिरवी रखकर बैंक से 25 लाख रुपए का लोन लिया था और बाकी रकम रिश्तेदारों से उधार ली थी। पहले साल अच्छा मुनाफा होने पर गांव में अपना मकान बनवाया। दूसरे साल 12 बीघा में नागौरी मेथी की खेती की और बाकी जमीन अश्वगंधा के लिए छोड़ दी। इस साल उन्हें उम्मीद है कि पूरा कर्ज उतर जाएगा। वे बताते हैं कि मेथी की मसाला कंपनियों में काफी मांग है, लेकिन स्थानीय मंडियों में सही भाव नहीं मिल पाता। एक बीघा में 40 किलो बीज की बुवाई एक बीघा में करीब 40 किलो नागौरी बीज लगता है। बीज की कीमत करीब 60 हजार रुपए प्रति क्विंटल है। बुवाई से पहले खेत में प्लाऊ चलाया जाता है। गोबर का खाद डालने के बाद रोटोवेटर से मिट्टी को भुरभुरी किया जाता है। खेत समतल कर सफाई की जाती है। इसके बाद दंताली (पारंपरिक औजार) से बीज को मिट्टी में करीब एक इंच गहराई तक मिक्स किया जाता है। फिर इसके बाद फव्वारे से सिंचाई की जाती है। अच्छी पैदावार के लिए एक बीघा में एक ट्रॉली गोबर खाद डालते हैं। इसके साथ DAVP खाद का उपयोग करते हैं। महीने में चार पानी की जरूरत अक्टूबर महीने में बुवाई करने के बाद एक महीने में पहली कटिंग और इसके बाद हर सातवें दिन कटिंग होती है। अब तक पांच कटिंग हो चुकी हैं। एक बीघा से करीब एक क्विंटल सूखी मेथी निकलती है। अब तक करीब 50 क्विंटल मेथी बेच चुके हैं, जिससे उन्हें साढ़े तीन लाख रुपए की आमदनी हो चुकी है। वर्तमान में बाजार भाव करीब 80 रुपए प्रति किलो चल रहा है। कटाई के बाद मेथी को सुखाने में करीब चार दिन लगते हैं। इसके लिए पहले मैदान को साफ किया जाता है, फिर मैटिंग बिछाकर मेथी फैलाते हैं। ऊपर से प्लास्टिक शीट डाली जाती है ताकि ओस से फसल खराब न हो। करीब तीन महीने तक कटिंग के बाद पौधों को बीज बनने के लिए छोड़ दिया जाता है। एक बीघा से 2 क्विंटल तक बीज (भाव-60 हजार रुपए प्रति क्विंटल) निकलता है। मेथी को काले मच्छर से खतरा वेदप्रकाश ने बताया- मेथी की फसल को काले मच्छर का खतरा रहता है, खासकर बादल छाने पर यह समस्या बढ़ जाती है। बचाव के लिए ‘इनमिडा’ दवा का छिड़काव किया जाता है। 500 लीटर पानी में आधा लीटर दवा मिलाकर पांच बीघा में स्प्रे किया जाता है। बाजार में इस दवा की कीमत करीब 1400 रुपए प्रति लीटर है। — खेती-किसानी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… पढ़ाई छोड़कर पुदीना से 60 लाख रुपए कमा रहा:मसाला कंपनियों में जबरदस्त डिमांड; दिल्ली-गुजरात के व्यापारी खरीदने को पहुंच रहे पढ़ाई में मन नहीं था, 10वीं बाद गुजरात में 13 साल नौकरी की। हुनर सीखकर वापस गांव लौटा और ऑयल मिल की शुरुआत की, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। फैक्ट्री बंद हो गई। (पूरी खबर पढ़ें)


