एमवाय अस्पताल से पीडियाट्रिक आईसीयू को हटाकर सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में शिफ्ट कर दिया है। पिछले साल अगस्त में एमवायएच में चूहों द्वारा शिशुओं को कुतरने की घटना के बाद यह फैसला किया गया था। चूहा कांड के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और इनफ्रास्ट्रक्चर पर भी गंभीर सवाल उठे थे। इसके बाद प्रशासन को बच्चों के इलाज की व्यवस्था में बदलाव करना पड़ा। 5 माह में 45 बेड की यह यूनिट अब बनकर तैयार हो चुकी है। यहां बच्चों का इलाज शुरू कर दिया गया है। उम्र के हिसाब से बनाए वार्ड, मॉड्यूलर ओटी भी शुरू सुपर स्पेशिएलिटी में बच्चों के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस नई पीडियाट्रिक यूनिट शुरू की गई है। यहां 28 दिन से कम उम्र के नवजात शिशुओं के लिए 12 बेड का एनआईसीयू, 28 दिन से 5 साल तक के बच्चों के लिए 15 बेड का पीआईसीयू और 12 साल तक के बच्चों के लिए 17 बेड का वार्ड बनाया है। इस तरह कुल 45 बेड की यूनिट विकसित की गई है। यूनिट के साथ 24 घंटे उपलब्ध मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, सीटी स्कैन सहित अन्य जांच सुविधाएं, आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षित सपोर्ट टीम भी मौजूद रहेगी। अभी 12 शिशु भर्ती, सर्जरी की भी सुविधा रहेगी अस्पताल प्रशासन के अनुसार यूनिट को निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार तैयार किया है, ताकि गंभीर और नवजात बच्चों को सुरक्षित इलाज मिल सके। एमवायएच की तुलना में सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में बेहतर स्वच्छता, आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्बर और नियंत्रित आईसीयू वातावरण उपलब्ध है। सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. डीके शर्मा ने बताया अब अस्पताल में बच्चों की सर्जरी और गंभीर मामलों के इलाज की सुविधा उपलब्ध है। फिलहाल इस यूनिट में एक दर्जन से अधिक बच्चे भर्ती हैं। हाई कोर्ट के निर्देश पर की गई शिफ्टिंग, चूहा कांड के 5 माह बाद भी दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई एमवाय अस्पताल में चूहों द्वारा नवजातों को कुतरने की घटना को 5 माह से अधिक हो चुके हैं, लेकिन जिम्मेदारों पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। 31 अगस्त और 1 सितंबर की रात धार और देवास के दो नवजातों को चूहों ने कुतर दिया था। इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई। घटना के बाद शासन और अस्पताल प्रबंधन ने नवजातों की तत्काल शिफ्टिंग और सुरक्षित वार्ड बनाने के दावे किए थे। हाई कोर्ट ने भी स्वतः संज्ञान लेकर एनआईसीयू को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने और सुरक्षा व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे।


