जहां तक नजर जाती है, वहां तक दस फीट ऊंची बाउंड्रीवॉल और उसके ऊपर तार की फेंसिंग। किले जैसी यह संरचना सिर्फ एक आश्रम को नहीं, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों की जमीन को अपने भीतर समेटे हुए है। यौन उत्पीड़न और देह व्यापार के आरोपों से घिरे अशोकनगर जिले में स्थित आनंदपुर ट्रस्ट पर अब जमीन कब्जाने के भी आरोप लग रहे हैं। स्थानीय किसानों और ग्रामीणों का आरोप है कि ट्रस्ट ने 30 से अधिक गांवों की जमीन को बाउंड्रीवॉल के भीतर कर लिया है। इनमें गरीब आदिवासी व अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों की पैतृक जमीन है। इसके अलावा श्मशान, चरनोई भूमि, नाले और तालाबों की जमीन भी शामिल है। किसानों का दावा है कि अब वे अपनी ही जमीन पर मजदूरी करने के लिए मजबूर हैं। आनंदपुर ट्रस्ट की दीवारें : श्मशान से खेत तक, सब भीतर 1. ट्रस्ट प्रबंधन का कहना है कि उसके पास करीब 9000 बीघा जमीन है। ट्रस्ट के महात्मा शब्द सागरानंद (कुलदीप महात्मा) का कहना है कि ट्रस्ट ने किसी भी जमीन पर अवैध कब्जा नहीं किया है। ट्रस्ट की करीब 9000 बीघा जमीन है, जिसका पूरा रिकॉर्ड राजस्व शाखा के पास है। इन जमीनों पर वर्षों से खेती हो रही है। 2. राजस्व विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, दो साल पहले लगान गणना के दौरान 40 से अधिक पटवारियों की जांच में ट्रस्ट के नाम 2000 हेक्टेयर (करीब 9500 बीघा) जमीन दर्ज पाई गई थी। हाल ही में तहसील स्तर से निकाले गए आंकड़ों में यह रकबा 2053 हेक्टेयर (करीब 9750 बीघा) बताया गया है। 3. किसानों का आरोप है कि ट्रस्ट ने गांवों की सामूहिक जमीन और निजी कृषि भूमि को भी बाउंड्रीवॉल के भीतर कर लिया है। इसलिए आंकड़ा 14000 बीघा से अधिक है। कुछ जमीनों को लेकर पहले भी शिकायतें हुईं। कुछ महीने पहले शांतपुर गांव में श्मशान की जमीन को राजस्व विभाग ने मुक्त कराया था। यह भी दीवार के भीतर थी। एक प्रशासनिक अफसर की जमीन भी इसी दीवार में फंसी जहां तक नजर, वहां तक ट्रस्ट की जमीन


