उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। शुक्रवार को गौर (भारतीय बायसन) पुनर्स्थापना कार्यक्रम के दूसरे चरण की सफलतापूर्वक शुरुआत हुई। इस अभियान के तहत सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से लाए गए पांच गौर को बांधवगढ़ के कलवाह इलाके में बने विशेष बाड़े में छोड़ा गया है। इन पांच गौरों में एक नर और चार मादा शामिल हैं। सुरक्षित तरीके से बाड़े में छोड़े गौरों को सुरक्षित तरीके से बाड़े में छोड़ने की प्रक्रिया सुबह 10 बजे पूरी की गई। इस खास मौके पर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय और उपसंचालक योहान कटारा खुद मौजूद रहे। इन गौरों को एक दिन पहले यानी 22 जनवरी को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना क्षेत्र से पकड़ा गया था। इस टीम का नेतृत्व क्षेत्र संचालक राखी नंदा और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के वैज्ञानिक डॉ. पराग निगम कर रहे थे। आनुवंशिक विविधता बढ़ाना मुख्य लक्ष्य यह पूरा प्रोजेक्ट भारतीय वन्यजीव संस्थान और मध्य प्रदेश वन विभाग मिलकर चला रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि गौरों को एक जगह से दूसरी जगह लाने का मुख्य उद्देश्य उनकी नस्लों में विविधता लाना और उनकी आबादी को स्वस्थ तरीके से बढ़ाना है। इससे पहले, फरवरी 2025 में प्रोजेक्ट के पहले चरण के दौरान 22 गौरों को बांधवगढ़ लाया गया था, जो अब पूरी तरह सुरक्षित हैं। 27 और गौर लाने की तैयारी प्रोजेक्ट के इस दूसरे चरण में 25 जनवरी 2026 तक कुल 27 गौरों को सतपुड़ा से बांधवगढ़ लाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए वन विभाग ने 9 विशेष टीमें बनाई हैं। हर टीम में वन अधिकारी, डॉक्टर और सुरक्षाकर्मी समेत 10 सदस्य शामिल हैं। गौरों को लाने-ले जाने के लिए चार विशेष वाहनों का उपयोग किया जा रहा है ताकि उन्हें कोई चोट न पहुंचे। बांधवगढ़ में फिर लौट रही गौरों की रौनक एक समय था जब 1990 के दशक में बांधवगढ़ से गौर पूरी तरह खत्म हो गए थे। इसके बाद साल 2010-11 में कान्हा टाइगर रिजर्व से 50 गौर लाए गए थे, जिसके बाद उनकी संख्या बढ़ने लगी। आज बांधवगढ़ में गौरों की कुल संख्या 191 के पार पहुंच चुकी है। निगरानी के बाद दी जाएगी आजादी फिलहाल, नए मेहमानों को कलवाह क्षेत्र के दो हेक्टेयर के छोटे बाड़े में रखा गया है। यहां विशेषज्ञ उनकी सेहत और व्यवहार पर नजर रखेंगे। करीब चार दिनों की निगरानी के बाद इन्हें 20 हेक्टेयर के बड़े बाड़े में शिफ्ट किया जाएगा, जहां वे प्राकृतिक माहौल में घुल-मिल सकेंगे।


