जल संचयन, जनभागीदारी अभियान में टारगेट दिए गए:सरपंच-सचिव संगठन ने कहा- ये प्रताड़ना; सस्पेंड GRS बोला- इंजीनियर भी दोषी

सरपंच-सचिव और रोजगार सहायक संगठन के संयुक्त मोर्चा ने स्वीकार किया कि टारगेट देकर उनसे काम लिए जा रहे हैं। जल संचयन, जनभागीदारी अभियान हो या फिर एक बगिया मां के नाम स्कीम, इनमें टारगेट देकर काम कराया, कई पंचायतकर्मियों को मानसिक रूप से प्रताड़ना झेलना पड़ी हैं। सरकार को टारगेट देना बंद करना चाहिए, जहां जैसी जरूरत है, वैसा काम लिया जाना चाहिए। इस बात का खुलासा पंचायत सचिव और सरपंच संघ के जिलाध्यक्षों ने दैनिक भास्कर से बातचीत में किया हैं। सरपंच संघ के जिलाध्यक्ष श्रीराम पटेल ने बताया कि जल संरक्षण के कार्यों में खेत तालाब, एक बगिया मां के नाम बगिया के पैसे अभी तक हितग्राहियों को नहीं मिले हैं। अब जमीन पर काम नहीं हुआ तो जिले के अधिकारी जांच करवा रहे हैं और जबरन परेशान किया जा रहा हैं। सचिव संघ जिलाध्यक्ष नरेंद्र प्रजापति ने कहा कि जल संचयन, जनभागीदारी सहित कई ऐसी स्कीम हैं, जिनमें शासन-प्रशासन के द्वारा टारगेट दिए जा रहे हैं। ये तरीका गलत हैं। यह सिस्टम बंद होना चाहिए। आरोप- इंजीनियरों ने सेट कर लिया कमीशन
सरपंच-सचिवों ने कहा कि, पंचायत में सीसी रोड़ हो या फिर भवन निर्माण के काम, गांव में गुणवत्ता के साथ काम करने की जिम्मेदारी सरपंचों की रहती हैं। रोड़ उखड़ जाए तो जांच में सरपंच-सचिव को दोषी पाकर रिकवरी निकाली जाती हैं। गबन का केस दर्ज कर धारा 40 के तहत कार्रवाई होती हैं। लेकिन शासन का इंजीनियरों के लिए कोई नियम नहीं हैं। प्रत्येक काम का मूल्यांकन कराने के लिए सब इंजीनियर को कुल लागत का 5% और असिस्टेंट इंजीनियर यानी एई को 2% कमीशन देना होता हैं। यह इंजीनियरों ने फिक्स करके रखा हैं। सस्पेंड जीआरएस ने सिस्टम पर उठाए सवाल
जल संचयन, जनभागीदारी अभियान में हुए फर्जीवाड़े के तहत हरसूद जनपद पंचायत की शाहपुरा माल ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक को निलंबित किया गया हैं। निलंबित रोजगार सहायक कृपाराम कलमें ने कहा कि मुझे तो तय सीमा में काम करने के लिए टारगेट दिया गया था। अब जो काम हुआ है, उसका मूल्यांकन तो इंजीनियर श्वेताली लुक ने किया हैं। इस प्रक्रिया में सरपंच-सचिव और इंजीनियर भी शामिल रहते हैं। मैं अकेला दोषी थोड़ी ना हूं। इधर, सीईओ जिला पंचायत ने अब तक किसी इंजीनियर पर एक्शन नहीं लिया हैं। जबकि सैकड़ों तालाबों की राशि बगैर काम के मूल्यांकन होने के बाद निकाली गई हैं। सीनियर इंजीनियर अटैच, जूनियरों को प्रभार
दरअसल, खंडवा जिला पंचायत के माध्यम से पूरे पंचायत विभाग में मनमानी पूर्वक कार्य कराए जा रहे हैं। भ्रष्टाचार और गबन के मामलों में दोषी पाए गए कई इंजीनियरों को मुख्य धारा में लाकर पोस्टिंग दी गई हैं। कार्यपालन यंत्री से लेकर सहायक यंत्री तक की पोस्ट से उन्हें नवाजा गया हैं। इन पर आपत्ति लेने वाली जिला पंचायत अध्यक्ष पिंकी वानखेड़े को सिस्टम ने घेर लिया हैं। जिले में दूसरे नंबर पर सीनियरटी रखने वाले सहायक यंत्री अरविंद पाटीदार को आरईएस में अटैच करके रखा हैं। जबकि इसके पहले वे हरसूद जनपद के सीईओ रह चुके हैं। बिना किसी आरोप के उन्हें हटाया गया। हरसूद के वर्तमान जनपद सीईओ जितेंद्र ठाकुर के पास तीन जनपदों का प्रभार हैं।

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