कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), झालावाड़ में एक दिवसीय कृषक-वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम के तहत एग्री-ड्रोन का विशेष लाइव प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक ड्रोन तकनीक से परिचित कराना और कृषि कार्यों को अधिक सरल, सटीक एवं प्रभावी बनाना था। केंद्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. संतोष झाझड़िया ने बताया कि एग्री-ड्रोन तकनीक से कीट नियंत्रण, उर्वरक और कीटनाशकों का छिड़काव पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक सटीक, सुरक्षित और समय बचाने वाला है। यह तकनीक किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों की ओर अग्रसर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। कृषि अनुसंधान केंद्र, कोटा से आए पौध व्याधि वैज्ञानिक और मृदा वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र यादव ने संयुक्त रूप से जानकारी दी कि ड्रोन तकनीक से फसलों में कीटनाशक एवं उर्वरक का समान, नियंत्रित और लक्षित छिड़काव संभव है। इससे रोग-कीट प्रबंधन बेहतर होता है, श्रम लागत कम होती है और कम समय में अधिक क्षेत्र को कवर किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि ड्रोन के उपयोग से छिड़काव की गुणवत्ता बढ़ती है, जिससे किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने में सहायता मिलती है। साथ ही, किसान रसायनों के सीधे संपर्क से भी बचते हैं, जिससे स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव कम होते हैं। केंद्र के प्रसार वैज्ञानिक एवं एग्री-ड्रोन प्रभारी डॉ. मोहम्मद यूनुस ने बताया कि ड्रोन द्वारा डिजिटल फेंसिंग के माध्यम से निर्धारित क्षेत्र में सटीक छिड़काव किया जा सकता है। इस अवसर पर 30 किसानों ने कार्यक्रम में भाग लिया। किसानों ने ड्रोन के संचालन को नजदीक से देखा, वैज्ञानिकों से संवाद किया और अपने खेतों में इसके उपयोग को लेकर जिज्ञासाएं साझा कीं। डॉ. यूनुस ने यह भी बताया कि ड्रोन तकनीक अपनाने के इच्छुक किसान ड्रोन पायलट प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं और संचालन नियमों का पालन करना आवश्यक है। प्रदर्शन के दौरान खेत की वास्तविक परिस्थितियों में ड्रोन को उड़ाकर कार्य दिखाया, इसे देखकर किसानों ने गहरी रुचि दिखाई। उपस्थित किसानों ने इस तकनीक को भविष्य की खेती के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए इसे अपनाने की इच्छा व्यक्त की।


