अजमेर व नागौर जिले के सीमा क्षेत्र का गांव, जहां हर रोज रात में 50 से अधिक गाड़ियों से प्रदेश भर में राज्य वृक्ष खेजड़ी की तस्करी की जाती है। करकेड़ी गांव से खेजड़ी की गीली व सूखी लकड़ी 10 जिलों में भेजी जा रही है। 12 किमी में अवैध रूप से 7 आरा मशीन लगी है, प्रत्येक प्लांट से 1500 टन लकड़ी सप्लाई की जा रही है। तस्कर दिन में खुलेआम डील करते हैं और रात को गोदाम तक गाड़ी पहुंचा देते हैं। तस्करी का खुलासा करने के लिए दैनिक भास्कर टीम करकेड़ी गांव पहुंची। भास्कर व भारतीय जीव रक्षा एवं वन्य पर्यावरण समिति टीम दो महीने तक तस्करों के संपर्क में रही। डील की और गाड़ियां मंगवाई। हर रूट पर पीछा किया। तस्कर बिना रोक-टोक जयपुर, सीकर, चूरू, बीकानेर, नागौर, अजमेर, ब्यावर, दूदू सहित 10-12 जिलो में लकड़ी भेजते हैं। तस्करों ने खुली डील की और गाड़ियां भेजने को तैयार हुए। कहा कि पुलिस और वन विभाग का डर नहीं है। जितनी गाड़ियां मंगवानी हो एक दिन पहले बताना। 500 व 550 रुपए प्रति क्विंटल में बिक रही लकड़ी भास्कर टीम ने दो महीने तक जयपुर, सीकर, बीकानेर, जोधपुर जाने वाली तस्करों की गाड़ियों का पीछा किया। गाड़ियां थानों व पुलिस चौकियों के सामने निकली मगर रोका किसी ने नहीं। टीम करकेड़ी स्थित मुख्य सरगना तक पहुंची। 550 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से रुपए मांगे। फिर टीम सरपंच परिवार से जुड़े हाकिम खां से मिली। उन्होंने कहा कि उनके भाई सरपंच है, वो भी यही काम करते है। मैं आपको 500 रुपए प्रति क्विंटल दे दूंगा। कहा कि गाड़ी मेरी ही होगी और आपके बताए स्थान पर पहुंचा दूंगा, जिसमें किराया अलग से नहीं लगेगा। आपको केवल जगह बतानी है। “अजमेर के करकेड़ी में खेजड़ी का दोहन होना और प्रदेशभर में तस्करी गंभीर अपराध है। प्रदेश में खेजड़ी बचाओं आंदोलन के तहत वन विभाग कार्यालय का घेराव करेंगे।”
-एलआर मेघवाल, प्रदेशाध्यक्ष, भारतीय जीव रक्षा एवं वन्य पर्यावरण समिति “नाकाबंदी में गाड़ियों की चेकिंग की जाती है। राज्य वृक्ष खेजड़ी की तस्करी गंभीर अपराध है। तस्करी रोकने के लिए प्रयासरत हैं। आमजन भी पुलिस का सहयोग करे।”
– मृदुल कच्छावा, एसपी नागौर।


