महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय का मामला:20 बिंदुओं में कुलगुरु की शिकायत, राजभवन ने मांगी थी फैक्चुअल रिपोर्ट, एमजीएसयू ने दबाया राजभवन का पत्र

महाराजा गंगासिंह विवि के कुलपति के खिलाफ गंभीर आरोप लगे हैं। बीकानेर से एक भाजपा नेता ने वीसी के खिलाफ 20 बिंदुओं में भ्रष्टाचार, नियुक्ति, वाहनों का दुरुपयोग समेत, प्रश्न-पत्र और डिग्रियों की ऊंचे दामों में छपाई समेत कई मामलों में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। 28 नवंबर 2025 को ये शिकायत राजभवन पहुंची। 22 दिसंबर को राजभवन ने 5 दिन में रिपोर्ट मांगी। आज तक ये रिपोर्ट राजभवन नहीं पहुंची। कुलसचिव कार्यालय में ही 10 दिन तक राजभवन के पत्र को दबाए रखा गया। दरअसल 28 नवंबर को शहर भाजपा के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. भगवानसिंह मेड़तिया ने 20 बिंदुओं की महाराजा गंगासिंह विवि में चल रही गड़बड़ी की शिकायत कर कुलपति को हटाकर निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। शिकायत में हवाला दिया गया है कि विवि के सीक्रेसी विभाग से अब प्रश्न-पत्र, डिग्री समेत कुछ चीजों की प्रिंटिंग होती है जिसकी लागत की कोई ऑडिट नहीं होती। यही वजह है कि जो प्रिंटिंग अब तक 2 करोड़ रुपए में होती है वो अब 10 करोड़ तक होती है। 24 दिसंबर 2024 को एसीबी ने विवि में रेड डालकर 7 लाख रुपए नकद बरामद किए थे मगर बाद में एसीबी ने बिना जांच किए मामले में एफआर लगा दी। एसीबी की भूमिका की किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच होनी चाहिए क्योंकि एसीबी अधिकारी भी विवि से सांठगांठ कर एफआर लगाई। विवि में रिसर्च कार्मिक के रूप में लगे अमित पांडे के रोजमर्रा के कामकाज में हस्तक्षेप की जांच हो। शिकायत के बाद 22 दिसंबर 2025 को रिपोर्ट मांगी गई मगर रिपोर्ट राजभवन नहीं भेजी गई। 7 जनवरी को एक ई-मेल विवि के कुलसचिव को भेजा गया मगर वो ई-मेल 10 दिन तक दबाए रखा। शुक्रवार तक राजभवन फैक्चुअल रिपोर्ट नहीं भेजी गई। 22 दिसंबर को राजभवन ने इन मामलों पर मांगा था जवाब बीते दो सालों में 4 कुलगुरुओं पर हुई कार्रवाई बीते 2 सालों में राजस्थान में कुलगुरुओं पर खूब सवाल उठे। एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के वीसी अरुण कुमार समेत 4 कुलपतियों को किसी ना किसी मामले में हटाया गया। जबकि एक कुलगुरु ने खुद ही इस्तीफा दिया था। “आज मैं जयपुर हूं पर ये सही है कि मुझे एक-दो दिन पहले ही इस ई-मेल की सूचना मिली। मैं वापस आकर चेक करता हूं कि वो ई-मेल कब आया। अगर छुपाने की कोशिश हुई तो मैं जरूर एक्शन लूंगा।” जसवंत यादव, कुलसचिव, एमजीएस विवि “मेरे से कोई रिपोर्ट नहीं मांगी गई। किसी और से मांगी हो तो पता नहीं। रही बात शिकायतों की ये होती रहती हैं। कोई इश्यू नहीं।” -प्रो. मनोज दीक्षित, कुलगुरु, एमजीएस विवि “मैंने शिकायत की है मगर हैरानी इस बात की कि विवि राजभवन के पत्र को भी दबाने की कोशिश कर रहा है। मुझे उम्मीद है कि राजभवन किसी आईएएस से जांच कराएगा तब हकीकत सामने आ जाएगी।” -डॉ. भगवान सिंह मेड़तिया, भाजपा नेता शिकायत के प्रमुख बिंदु भगवान सिंह मेड़तिया की ओर से लिखे गए पत्र में आरोप लगाया गया कि सरकारी वाहन 8 साल पुराना हो या 2 लाख किमी चलने पर ही बदला जाता मगर विवि में 35 लाख रुपए से नया वाहन खरीदा गया और पुराना वाहन गायब कर दिया गया। विवि के बैंक खाते दूसरे बैंक में सिर्फ कमीशनखोरी के लिए ट्रांसफर करने की कोशिश हुई। इसका विरोध भी किया था मगर पूर्व वित्त नियंत्रक के साथ मिलकर गड़बड़ी की। फर्नीचर खरीद, विवि में राजनीति शास्त्र विषय न होने पर भी अंतरराष्ट्रीय सेमिनार कराया गया। राज्यपाल के सचिव के पत्र के बाद भी 5 साल से राजाराम चोयल को परीक्षा नियंत्रक बनाए रखा गया। कुलगुरु के आने-जाने के लिए स्पेशल गैलरी 30 लाख रुपए से बनाई। बीएड कॉलेजों की रिपोर्ट में गड़बड़ी की गई। बीएसएनएल से 10 लाख में होने वाले काम को 50 लाख से कराया। गार्डों की संख्या दोगुनी की। काम पर आधे भी नहीं आते। जो प्रश्न पत्र 2 करोड़ में छप रहे थे वे अब 10 करोड़ में छप रहे हैं। बीडीए के उपायुक्त और जूनियर आरएएस कुणाल राहड़ को कुलसचिव का चार्ज इसलिए दिया ताकि इस पूरे भ्रष्टाचार में लीपापोती हो सके।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *